Buddhism: अब गांव-गांव पहुंचेगा शांति का संदेश: औरंगाबाद में अशोक स्तंभ व बुद्ध प्रतिमा का अनावरण

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बौद्ध मतावलंबियों की नई पहल, सम्राट अशोक की विरासत को ग्रामीण भारत तक पहुंचाने की शुरुआत

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

औरंगाबाद। गणेश प्रसाद

सत्य, अहिंसा और शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बौद्ध मतावलंबियों ने एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अभियान की शुरुआत की है। इसी क्रम में औरंगाबाद जिले के बारूण प्रखंड के अमौना गांव में अशोक स्तंभ एवं भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया। यह पहल सम्राट अशोक की ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करते हुए गांव-गांव तक शांति का संदेश पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


पटना से आए अतिथियों ने किया अनावरण

समारोह का आयोजन सम्राट अशोक क्लब के तत्वावधान में किया गया। अशोक स्तंभ और बुद्ध प्रतिमा का अनावरण पटना म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिंहा तथा राजकीय आयुर्वेद कॉलेज पटना के उपाधीक्षक डॉ. अरुण कुमार शांतनु सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के दौरान बुद्ध के सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता और शांति के संदेशों की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा।


“दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए”

अपर निदेशक अशोक कुमार सिंहा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया तनाव और संघर्ष के मुहाने पर खड़ी है। ऐसे समय में शांति की स्थापना केवल बुद्ध के विचारों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि अशोक स्तंभ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता, सह-अस्तित्व और नैतिक शासन का संदेश है। इसी सोच के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अशोक स्तंभ स्थापित किए जा रहे हैं।

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डॉ. अरुण कुमार शांतनु ने बिहार को ज्ञान और करुणा की भूमि बताते हुए कहा कि यहीं से बुद्ध ने विश्व को शांति का मार्ग दिखाया था। अब उसी परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।


नागरिक धर्म अपनाने का आह्वान

सम्राट अशोक क्लब के राष्ट्रीय प्रवक्ता सच्चिदानंद मौर्य ने कहा कि बुद्ध का संदेश हमें पहले एक सच्चा नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि समाज को विभाजन से ऊपर उठकर मानवता और नैतिकता के मार्ग पर चलना होगा।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक सुरेश मेहता, जिला पार्षद धनंजय कुमार सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता वैद्यनाथ मेहता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। हजारों बौद्ध अनुयायियों ने समारोह में भाग लिया।


नौ स्थानों पर मौजूद हैं प्राचीन अशोक स्तंभ

इतिहासकारों के अनुसार वर्तमान में भारत और नेपाल में कुल नौ प्राचीन अशोक स्तंभ विद्यमान हैं। इनमें सारनाथ, प्रयागराज, फिरोजशाह कोटला, हिंदूराव अस्पताल, सांची, वैशाली, लौरिया-नंदनगढ़, लौरिया-रामपुरवा तथा लुंबिनी शामिल हैं।

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