Jales Siwan: जनवादी लेखक संघ का 45वां स्थापना दिवस: साहित्यकारों ने जनवाद और मानवता की आवाज बुलंद की

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कवि सम्मेलन व मुशायरे में एकता, प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी के स्वर गूंजे

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

सीवान। शहर के कन्हैयालाल केंद्रीय जिला पुस्तकालय में जनवादी लेखक संघ (जलेस) का 45वां स्थापना दिवस वरिष्ठ उस्ताद शायर कमर सीवानी की अध्यक्षता में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत जलेस के कोषाध्यक्ष डॉ. के. एहतेशाम द्वारा आगंतुक साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं सदस्यों के स्वागत से हुई। उन्होंने अपनी रचना के माध्यम से बीते समय की स्मृतियों और जीवन के बदलावों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।

जलेस सचिव मार्कण्डेय ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह हिन्दी-उर्दू लेखकों का ऐसा संगठन है, जो जनवाद के विरुद्ध हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ निरंतर आवाज उठाता रहा है। उन्होंने बताया कि यह मंच साम्राज्यवाद और फासीवाद का विरोधी तथा मानवता का पक्षधर है। कार्यकारी सचिव अरुण कुमार सिंह ने संगठन की स्थापना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 13-14 फरवरी 1982 को दिल्ली में जनपक्षीय रचनाकारों ने इसकी स्थापना की थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जनवाद पर विभिन्न प्रकार के हमले हो रहे हैं और लेखकों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है।

दूसरे चरण में आयोजित कवि सम्मेलन और मुशायरे में साहित्यिक रंग जम गया। विक्रमा पंडित विवेकी की प्रेम पर आधारित रचना, लाइची हरिराही की भूख और संवेदना पर केंद्रित कविता, तथा रेहान मुस्तफाबादी की प्रस्तुति ने खूब वाहवाही लूटी। अधिवक्ता अरशद अली ने नफरत के खिलाफ प्रभावशाली रचना प्रस्तुत की।

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अध्यक्ष कमर सीवानी ने अपनी देशप्रेम से ओतप्रोत रचना से समारोह में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने कहा कि जलेस सच्चाई का नगीना है, जो डगमगाते कदमों को संभालने का कार्य करता है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से युगल किशोर दूबे, डॉ इलतेफात आमजदी, उपेन्द्र कुमार यादव, डॉ जगन्नाथ प्रसाद, हैदर वारसी, परमा चौधरी, नीरज यादव, शशि कुमार, सैयद अब्बास अली, भोगेंद्र झा, नवल किशोर वर्मा तथा विकास तिवारी उपस्थित रहे।

अंत में प्रोफेसर उपेन्द्र नाथ यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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