जिला विधिक सेवा प्राधिकार के जागरूकता शिविर में मुफ्त कानूनी सहायता, जमानत, पैरोल और नालसा की योजनाओं की दी जानकारी, कैदियों ने लिया अपराध से दूर रहने का संकल्प
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
विधि संवाददाता l सिवान।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के तत्वावधान में रविवार को मंडल कारा सिवान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता मंडल कारा के अधीक्षक देवाशीष प्रसाद सिन्हा ने की। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को उनके विधिक अधिकारों, निःशुल्क कानूनी सहायता की उपलब्धता तथा समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनर्वास के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता गणेशाराम उर्फ ज्ञान रत्न ने कैदियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा वर्ष 2022 में कैदियों के हित में लागू विशेष प्रावधानों और सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार समय-समय पर नालसा की गाइडलाइन के अनुरूप जेलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और कानूनी अधिकारों की जानकारी बंदियों तक पहुंचाता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय और जरूरतमंद कैदी, जो निजी खर्च पर अधिवक्ता रखने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से निःशुल्क पैनल अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा कारागार विधिक सहायता क्लीनिक के माध्यम से बंदियों की कानूनी समस्याओं का समाधान भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन क्लीनिकों के माध्यम से कानूनी परामर्श, अधिवक्ताओं की नियुक्ति, जमानत, पैरोल, अपील और विभिन्न याचिकाओं में सहायता के साथ-साथ नियमित विधिक जागरूकता, शिकायत निवारण, न्यायालय एवं परिजनों से संवाद की सुविधा तथा कैदियों के संवैधानिक और प्रक्रियात्मक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
ज्ञान रत्न ने बताया कि यह सुविधा विचाराधीन बंदियों, दोषसिद्ध कैदियों, निरुद्ध व्यक्तियों, सिविल कैदियों के अलावा महिला बंदियों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, विदेशी नागरिकों, किशोरों, वृद्धजनों और दिव्यांग कैदियों जैसे संवेदनशील वर्गों को भी समान रूप से उपलब्ध कराई जाती है।
विधिक जानकारी के साथ उन्होंने जीवन मूल्यों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है कि वह इंसानियत, मानवता और भाईचारे की भावना को अपनाए। उन्होंने कैदियों से कहा कि उनके आचरण, व्यवहार और कार्यों से किसी दूसरे व्यक्ति को कष्ट नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने माता-पिता के त्याग और संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सपना देखते हैं, लेकिन गलत संगति और गलत रास्ते पर चलने से कई युवा अपना जीवन बर्बाद कर जेल तक पहुंच जाते हैं।
उन्होंने सभी बंदियों से संकल्प दिलाया कि जेल से रिहा होने के बाद वे दोबारा अपराध की दुनिया में नहीं लौटेंगे और समाज के जिम्मेदार नागरिक बनकर जीवन व्यतीत करेंगे। इस दौरान उपस्थित सभी कैदियों ने उत्साहपूर्वक अपराध से दूर रहने और सकारात्मक जीवन अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सिवान के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीतीश कुमार सिंह तथा प्राधिकार के सचिव एवं सिविल जज सुनील कुमार सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंत में मंडल कारा प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।






