दो दिन बाद भी पीड़ित परिवार से नहीं मिले अधिकारी-ठेकेदार
मजदूर नेता ने सुरक्षा और श्रम कानूनों के पालन पर उठाए सवाल

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता | सीवान
नगर परिषद में सफाई व्यवस्था से जुड़े एक एनजीओ के ड्राइवर की सड़क हादसे में मौत और उसके साथी कर्मी के गंभीर रूप से घायल होने के बाद नगर परिषद के सफाई कर्मियों और मजदूर संगठन में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घटना 20 सितंबर की रात की बताई जा रही है। ड्यूटी समाप्त करने के बाद घर लौट रहे एनजीओ कर्मी मंथन पाण्डेय की सड़क हादसे में मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद ऋषि राज गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल कर्मी का इलाज चल रहा है।
घटना के दो दिन बाद भी नगर परिषद से जुड़े किसी अधिकारी अथवा संबंधित ठेकेदार के पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचने का आरोप लगाया गया है। इससे सफाई कर्मियों और मजदूर संगठन में नाराजगी और बढ़ गई है। कर्मियों का कहना है कि वे शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दिन-रात काम करते हैं, लेकिन हादसे के बाद उनके परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

मजदूर यूनियन ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मजदूर यूनियन के राज्य सचिव अमित कुमार ने घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए एनजीओ और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई और अन्य कार्यों में लगे मजदूरों से कई बार रात में भी काम कराया जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाती।
अमित कुमार का कहना है कि कर्मचारियों को काम पर लगाने के साथ उनकी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाओं को सुनिश्चित करना भी संबंधित एजेंसी और व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि कर्मियों से काम तो लिया जा रहा है, लेकिन उनके हितों और सुरक्षा को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
ईपीएफ और ईएसआईसी को लेकर भी सवाल
मजदूर संगठन ने एनजीओ के माध्यम से कार्यरत कर्मियों के ईपीएफ और ईएसआईसी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। मजदूर नेता का आरोप है कि कई कर्मियों का ईपीएफ नहीं काटा जा रहा है और उन्हें ईएसआईसी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। ऐसे में किसी दुर्घटना, बीमारी या अन्य आपात स्थिति में कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित एजेंसी और नगर परिषद का पक्ष सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
465 कर्मियों की तैनाती का दावा, जमीन पर संख्या कम होने का आरोप
मजदूर नेता अमित कुमार ने नगर परिषद की सफाई व्यवस्था में कर्मियों की संख्या को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार शहर के 30 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए तीन एजेंसियां काम कर रही हैं। एग्रीमेंट के अनुसार कुल 465 कर्मियों की तैनाती होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविकता में कई स्थानों पर निर्धारित संख्या में कर्मी मौजूद नहीं हैं और धरातल पर 200 से भी कम कर्मियों से काम कराया जा रहा है। उनका दावा है कि कागज पर निर्धारित संख्या और वास्तविक रूप से काम कर रहे कर्मियों की संख्या में बड़ा अंतर है।
मजदूर संगठन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित एजेंसियों द्वारा कितने कर्मियों की तैनाती की गई है और नगर परिषद के साथ हुए समझौते के अनुसार कितने कर्मियों को कार्य पर लगाया जाना चाहिए।
वेतन से कटौती का भी लगाया आरोप
मजदूर नेता ने कर्मियों के मासिक भुगतान को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सफाई कर्मियों को मिलने वाले वेतन में कथित रूप से अनुचित कटौती की जाती है। जब कर्मी इस संबंध में शिकायत करते हैं तो उनकी समस्या का उचित समाधान नहीं किया जाता।
मजदूर संगठन का कहना है कि सफाई कर्मी शहर की स्वच्छता व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में उनके वेतन, काम के घंटे, सुरक्षा उपकरण, सामाजिक सुरक्षा और अन्य श्रम अधिकारों से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी होनी चाहिए।
हादसे के बाद कर्मचारियों में बढ़ी नाराजगी
मंथन पाण्डेय की मौत के बाद नगर परिषद से जुड़े कर्मचारियों में शोक के साथ-साथ नाराजगी भी है। कर्मियों का कहना है कि साथी की मौत ने एक बार फिर कार्यस्थल और सड़क सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। उनका कहना है कि यदि कर्मचारी देर रात तक काम करते हैं तो उनकी सुरक्षित आवाजाही और अन्य सुरक्षा इंतजामों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
घायल कर्मी ऋषि राज के इलाज और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी मजदूर संगठन ने चिंता जताई है। संगठन की मांग है कि घायल कर्मी को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और उसके परिवार को आवश्यक सहायता दी जाए।
23 को नगर परिषद परिसर में शोकसभा, दी जाएगी श्रद्धांजलि
मृतक मंथन पाण्डेय की आत्मा की शांति और घायल ऋषि राज के जल्द स्वस्थ होने की कामना को लेकर नगर परिषद के कर्मियों की ओर से शोकसभा आयोजित की जाएगी। कर्मियों के अनुसार 23 सितंबर को दोपहर 12 बजे नगर परिषद परिसर में कर्मचारी एकत्रित होकर मंथन पाण्डेय को श्रद्धांजलि देंगे।
मजदूर संगठन ने इस मौके पर कर्मचारियों की समस्याओं को भी उठाने की बात कही है। संगठन का कहना है कि शोकसभा केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, वेतन और कार्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान आकर्षित कराया जाएगा।
जांच और कार्रवाई की मांग
मजदूर संगठन ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। इसमें सड़क हादसे के कारणों के साथ-साथ यह भी जांचने की मांग की गई है कि मृतक और घायल कर्मी किस एजेंसी के माध्यम से कार्यरत थे, उनकी ड्यूटी का समय क्या था, क्या उन्हें आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी और संबंधित एजेंसी द्वारा श्रम कानूनों के तहत आवश्यक सुविधाएं दी जा रही थीं।
घटना के बाद अब नगर परिषद और संबंधित एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए हादसे की परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की जांच कराएगा। साथ ही मृतक के परिवार और घायल कर्मी को नियमानुसार सहायता मिलने की दिशा में भी कार्रवाई होगी।






