Bihar Day: मॉरीशस के पीएम को बिहार आने का न्योता, मिथिला पेंटिंग को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच

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बिहार दिवस के मौके पर सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति, कलाकारों के लिए बनेंगे नए अवसर

सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संजीव कुमार। पटना।

बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से शिष्टाचार मुलाकात कर उन्हें ‘बिहार दिवस’ के अवसर पर बिहार आने का औपचारिक न्योता दिया। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने और कला के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक के दौरान बिहार की प्रसिद्ध मिथिला चित्रकला (मधुबनी पेंटिंग) को मॉरीशस में बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। सचिव ने बताया कि मॉरीशस में इस पारंपरिक कला के प्रति लोगों में काफी रुचि देखी जा रही है और कई लोग इसे सीखना चाहते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाओं, ऑनलाइन कक्षाओं और प्रदर्शनी के माध्यम से कलाकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है। इससे न केवल कला का प्रचार-प्रसार होगा, बल्कि कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिलेगा।

प्रणव कुमार इन दिनों ‘बिहार दिवस’ समारोह के तहत राजकीय अतिथि के रूप में मॉरीशस दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने वहां भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को और अधिक सक्रिय बनाने पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने मॉरीशस के प्रतिनिधियों और शिष्टमंडल को बिहार आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगी।

बैठक में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि पांडुलिपियां हमारी ऐतिहासिक धरोहर हैं और उनके संरक्षण के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। इस दिशा में तकनीकी सहयोग, डिजिटाइजेशन प्रोजेक्ट और शोध कार्य को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है, ताकि इन धरोहरों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जा सके।

सचिव ने कहा कि मिथिला पेंटिंग बिहार की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। मॉरीशस में इस कला के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए भविष्य में कलाकार शिविर, सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम और संयुक्त प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा।

इस पहल से न केवल बिहार और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक रिश्ते और मजबूत होंगे, बल्कि बिहार की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक पहचान मिलने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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