सैकड़ों वाहनों का काफिला, श्रद्धा और सौहार्द के बीच बनगांव से सिहोल तक 50 किमी की पदयात्रा
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
सहरसा । विकास कुमार
सहरसा जिले के बनगांव नगर पंचायत मंगलवार को आस्था और उत्साह से सराबोर रहा। संत लक्ष्मीनाथ गोसाई की कर्मस्थली बाबाजी कुटी, बनगांव से उनके 232वें जन्मोत्सव के अवसर पर परंपरागत ‘सर्वा सद्भावना यात्रा’ धूमधाम से निकाली गई। यात्रा में जिले और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों वाहनों के काफिले और पैदल चलते भक्तों ने पूरे मार्ग को भक्ति और उत्साह से भर दिया।
गोस्वामी लक्ष्मीनाथ सेवा मिशन के सदस्य धनंजय कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2016 से मिशन यह उत्सव लगातार आयोजित कर रहा है। उद्देश्य है—संत के जीवन मूल्यों, विचारों और सामाजिक संदेशों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना। उन्होंने बताया कि संत लक्ष्मीनाथ अपने भक्तों को प्रेमपूर्वक “सर्वा” कहकर संबोधित करते थे। इसी भावना और परंपरा को जीवंत रखने के लिए प्रतिवर्ष ‘सर्वा सद्भावना यात्रा’ का आयोजन किया जाता है।
सुबह मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और ध्वज पूजन के साथ यात्रा की शुरुआत हुई। यात्रा बनगांव स्थित बाबाजी कुटी से निकलकर सिहोल स्थित बाबाजी कुटी तक लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, फल, प्रसाद और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई थी। स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने भी सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।
यात्रा के दौरान भक्तों ने जयघोष, भक्ति गीत और संत के पदों का गायन करते हुए एकता का संदेश दिया। कई स्थानों पर महिलाओं के समूहों ने फूल-वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। यात्रा के समापन पर सिहोल में भव्य समारोह और सामूहिक प्रसाद का आयोजन होगा।
संत लक्ष्मीनाथ गोसाई का जन्म 1787 में परसरमा गांव में हुआ था और 1872 में उनका देहांत हुआ। वे मिथिला क्षेत्र के प्रतिष्ठित योगी, साधक, कवि और समाज सुधारक माने जाते हैं। लोक-जागरण, समानता और करुणा पर आधारित उनके विचार आज भी समाज का मार्गदर्शन करते हैं। गोस्वामी लक्ष्मीनाथ मिशन का कहना है कि संत के सिद्धांत—समरसता, समानता, करुणा और जनसेवा—यात्रा के केंद्र में हैं।






