Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव 2026 विशेष: ‘विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा होगा, जाति और पैसा इस बार असर नहीं डालेगा’

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चुनाव डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सीवान | विशेष बातचीत

सीवान जिले के मुखिया संघ के जिला अध्यक्ष और मैरवा प्रखंड अंतर्गत मुड़ियारी पंचायत के वरिष्ठ पंचायत प्रतिनिधि अजय भास्कर चौहान पिछले दो दशकों से पंचायत राजनीति और विकास की मुख्यधारा में सक्रिय हैं। लगातार 20 वर्षों से पंचायत प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे चौहान वर्ष 2016 में जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। पंचायत चुनाव 2026 की आहट के बीच उन्होंने पंचायत की राजनीति, विकास, युवाओं की भूमिका, जातीय समीकरण और भ्रष्टाचार के आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी।

केएमपी भारत डिजिटल के स्टेट हेड कृष्ण मुरारी पांडेय से खास बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि इस बार पंचायत चुनाव में विकास और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा होगा। जनता अब पहले से ज्यादा जागरूक है और जाति, पैसा या बाहुबल के प्रभाव में आने वाली नहीं है।


सवाल: आने वाले पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या होगा?

अजय भास्कर चौहान:
देखिए, इस बार पंचायत चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा विकास और रोजगार होगा। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम किया है। अब जनता की अपेक्षाएं बदल चुकी हैं। लोग अब रोजगार और स्थानीय स्तर पर अवसर चाहते हैं। विकास अब चुनाव का केंद्र बनेगा।


सवाल: क्या इस बार जाति और पैसा चुनाव को प्रभावित करेंगे?

अजय भास्कर चौहान:
मेरा मानना है कि इस बार जाति और पैसा कोई मायने नहीं रखेगा। गांव की जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है। पहले जो समीकरण प्रभावी हुआ करते थे, अब उनका असर कम हो गया है। अब जनता विकास कार्य देखने के बाद ही अपना निर्णय करेगी।

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सवाल: क्या जनता पुराने प्रतिनिधियों को बदलने का मन बना चुकी है?

अजय भास्कर चौहान:
यह पूरी तरह जनता पर निर्भर करता है। जो जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में समर्पण के साथ काम किया होगा, जनता के सुख-दुख में शामिल रहा होगा, उसे निश्चित रूप से दोबारा मौका मिलेगा। लेकिन जो जनता से दूर रहे, उनके लिए मुश्किलें हो सकती हैं।


सवाल: पंचायत चुनाव में राजनीतिक दलों की बढ़ती दखलंदाजी को आप कैसे देखते हैं?

अजय भास्कर चौहान:
पंचायत चुनाव मूल रूप से स्थानीय विकास का चुनाव है। यहां जनता दलों से ऊपर उठकर अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। अगर राजनीतिक दलों का अत्यधिक हस्तक्षेप होगा तो पंचायत के विकास की मूल भावना प्रभावित होगी। पंचायत की राजनीति को स्थानीय मुद्दों तक सीमित रहना चाहिए।


सवाल: पिछले पांच वर्षों में गांवों में विकास की स्थिति कैसी रही है?

अजय भास्कर चौहान:
पिछले पांच वर्षों में विकास की रफ्तार काफी तेज हुई है। सड़क, नाली, पेयजल, आवास और कई बुनियादी सुविधाओं पर बेहतर काम हुआ है। गांवों की तस्वीर बदली है। हालांकि अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।


सवाल: पंचायत प्रतिनिधियों पर अक्सर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोप लगते हैं, इसे आप कैसे देखते हैं?

अजय भास्कर चौहान:
जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगना नई बात नहीं है। लेकिन मेरा मानना है कि ऐसे आरोपों को चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। अगर जनता सवाल उठा रही है तो उसका जवाब विकास कार्यों के माध्यम से देना चाहिए। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे पारदर्शिता के साथ काम करें।


सवाल: पंचायत स्तर पर जनता की भूमिका को आप कितना महत्वपूर्ण मानते हैं?

अजय भास्कर चौहान:
जनता ही असली मालिक है। लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि है। अगर पंचायत प्रतिनिधियों पर सवाल उठते हैं तो उसे नकारना नहीं चाहिए, बल्कि उसे सुधार के अवसर के रूप में देखना चाहिए। पंचायत को विकसित पंचायत बनाने के लिए जनता और प्रतिनिधि दोनों की भागीदारी जरूरी है।


सवाल: इस बार पंचायत चुनाव में युवाओं की भूमिका कितनी अहम होगी?

अजय भास्कर चौहान:
इस बार युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। युवा वर्ग अब राजनीति और सामाजिक मुद्दों को गंभीरता से समझ रहा है। निष्पक्ष चुनाव कराने और बेहतर प्रतिनिधि चुनने में युवाओं की भागीदारी निर्णायक साबित होगी।


सवाल: क्या अब भी पंचायत चुनाव में पैसा और बाहुबल प्रभाव डालते हैं?

अजय भास्कर चौहान:
अब ऐसा नहीं है जैसा पहले होता था। पैसा और बाहुबल का प्रभाव लगातार कम हुआ है। जनता अब जागरूक है और समझ चुकी है कि विकास ही असली ताकत है। अब क्षेत्र की जनता किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है।


सवाल: अगर पंचायती व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करने का मौका मिले तो आप क्या करेंगे?

अजय भास्कर चौहान:
मैं पंचायत स्तर पर खेल क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दूंगा। आज युवाओं का खेल के प्रति रुझान काफी बढ़ा है। हर पंचायत में एक स्टेडियम का निर्माण होना चाहिए। इससे युवाओं को अवसर मिलेगा और वे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगे।


सवाल: पंचायत चुनाव लड़ने वालों के लिए आपका क्या संदेश है?

अजय भास्कर चौहान:
जो भी चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें जनता के बीच रहना चाहिए। जनता की समस्याओं को समझना चाहिए। चुनाव सिर्फ जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का अवसर है। अगर सेवा की भावना होगी तो जनता खुद समर्थन देगी।


अजय भास्कर चौहान की बातों से साफ है कि पंचायत चुनाव 2026 में विकास, रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे। जातीय समीकरण और धनबल की राजनीति को वे कमजोर मानते हैं। उनका विश्वास है कि अब गांव की जनता ज्यादा जागरूक है और काम के आधार पर ही अपने प्रतिनिधि का चयन करेगी।

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