Gayatri Mahayagya: सिधवल में माँ गायत्री की प्राण प्रतिष्ठा और 108 कुंडीय राष्ट्रीय शौर्य समृद्धि यज्ञ की पूर्णाहुति

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हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में फूलों की होली के साथ संपन्न हुआ भव्य आयोजन, शांतिकुंज हरिद्वार की टोली ने किया मार्गदर्शन

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सिवान

सिवान। जिले के सिद्ध गांव सिधवल में आयोजित माँ गायत्री की प्राण प्रतिष्ठा एवं 108 कुंडीय “राष्ट्रीय शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ” की पूर्णाहुति गुरुवार 12 मार्च 2026 को भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हो गई। इस विराट धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर फूलों की होली खेली गई, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया।

यह आयोजन गुरु गृह शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक प्रज्ञापुत्र संदीप पांडेय के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सिवान उपजोन के सभी सक्रिय परिजनों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों और आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बिहार के अलावा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गायत्री परिवार के सदस्य इस महायज्ञ में शामिल हुए।

महायज्ञ के संयोजकों ने बताया कि यह आयोजन लंबे समय की साधना और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। गायत्री साधना के 24 वर्षों के संकल्प और सहयोगी मित्रों तथा कार्यकर्ताओं के अथक पुरुषार्थ के बाद यह आध्यात्मिक महायज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और शांति का माहौल बना रहा और किसी प्रकार का विवाद या अव्यवस्था सामने नहीं आई।

इस महायज्ञ की शुरुआत 10 मार्च, मंगलवार को माँ गायत्री की प्राण प्रतिष्ठा के साथ हुई। श्रद्धालुओं के अनुसार उस दिन सविता देवता की मंद-मंद मुस्कान के बीच प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान अत्यंत दिव्य और सुखद अनुभव देने वाला रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ आहुतियों और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने राष्ट्र निर्माण, समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना और आध्यात्मिक जागरण का संकल्प भी लिया। आयोजन को सफल बनाने में सिधवल गांव सहित आसपास के कई गांवों के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

अंत में गायत्री शक्तिपीठ सिधवल और रचनात्मक गायत्री युवा मंडल सिवान के संयोजकों ने सभी सहयोगी भाई-बहनों, श्रद्धालुओं और ग्रामवासियों का स्वागत, वंदन और अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में सद्भाव, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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