Tribute Meeting: सिवान में शिक्षक नेता स्व. वागींद्र नाथ पाठक को श्रद्धांजलि, वक्ताओं ने कहा– शिक्षकों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्षरत रहे

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श्रद्धांजलि सभा में शिक्षक नेताओं और शिक्षकों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, उनके आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

एजुकेशन न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय। सिवान।

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ, सिवान के निवर्तमान जिला अध्यक्ष स्वर्गीय वागींद्र नाथ पाठक के स्वर्गारोहण पर रविवार को केदारनाथ पाण्डेय सभागार, निराला नगर स्थित संघ भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित होकर दिवंगत शिक्षक नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सारण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद सदस्य प्रो. डॉ. वीरेंद्र नारायण यादव, अध्यक्षता कर रहे प्रधानाध्यापक अजय पाण्डेय, आनंद पुष्कर पांडेय, डॉ. राहुल राज, विद्यासागर विद्यार्थी, प्रमंडल सचिव संतोष सिंह, अभय सिंह एवं कार्यक्रम संचालक मनोरंजन सिंह द्वारा स्व. वागींद्र नाथ पाठक के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. वीरेंद्र नारायण यादव ने स्व. पाठक से जुड़े अपने संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि शिक्षक समाज पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। शिक्षक बड़े सिद्धांतों के उत्तराधिकारी होते हैं और स्व. वागींद्र नाथ पाठक उसी परंपरा के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समाज के प्रति हमेशा संवेदनशील और जागरूक रहने की जरूरत है।

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सभा की अध्यक्षता कर रहे प्रधानाध्यापक अजय पाण्डेय ने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए आत्ममंथन और उनसे प्रेरणा लेने का दिन है। स्व. पाठक हमेशा शिक्षकों की समस्याओं और उनके अधिकारों को लेकर सक्रिय और सजग रहते थे। उनका जीवन शिक्षक समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

विशिष्ट अतिथि आनंद पुष्कर पांडेय ने कहा कि जिस महान व्यक्तित्व की आज श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई है, उनकी गोद में उनका बचपन बीता है। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्व. केदारनाथ पाण्डेय के वे अभिन्न सहयोगी और समर्थक थे। सिवान में मनन प्रसाद सिंह और स्व. वागींद्र नाथ पाठक की जोड़ी लंबे समय तक शिक्षक आंदोलन का नेतृत्व करती रही।

मुख्य वक्ता विद्यासागर विद्यार्थी ने कहा कि स्व. पाठक शिक्षकों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। वे शिक्षक समाज के सच्चे शुभचिंतक और मार्गदर्शक थे। वहीं वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि हम सभी को उनके पदचिह्नों पर चलकर शिक्षक समाज के हित में कार्य करना चाहिए।

वक्ता मनन सिंह ने कहा कि स्व. पाठक की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। डॉ. राहुल राज ने उनके साथ बिताए अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे शिक्षकों के सच्चे रहनुमा और प्रेरणास्रोत थे।

इसी क्रम में प्रभुनाथ सर और प्रशांत पुष्कर ने भजन “जगत में कोई नहीं परमानेंट” प्रस्तुत कर सभा को भावुक कर दिया। प्रमंडलीय अध्यक्ष शंकर प्रसाद यादव ने कहा कि स्व. पाठक अत्यंत सरल और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे। वहीं प्रमंडल सचिव संतोष सिंह ने कहा कि उन्होंने शिक्षक नेताओं की दूसरी पीढ़ी तैयार की, जिसके कारण आज कई शिक्षक नेता उनके मार्गदर्शन में आगे बढ़े हैं।

रजनी कांत सिंह ने कहा कि स्व. पाठक के निधन से संघ को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है, लेकिन उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। संतोष कुमार ओझा ने कहा कि उनमें विरोध करने वालों को भी साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता थी, जिसके कारण संघ को नई ऊंचाइयां मिलीं।

सभा को गणेश सिंह, वीरेंद्र कुमार राम, मुरलीधर पांडेय और रमाकांत पाठक ने भी संबोधित किया। श्रद्धांजलि सभा में शिक्षक सह साहित्यकार डॉ. मन्नू राय, डॉ. आशुतोष कुमार, कोषाध्यक्ष मनन प्रसाद सिंह, सचिव वीरेंद्र कुमार, संतोष कुमार सिंह, परीक्षा अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार, मिथिलेश कुमार मिश्र, रामाकांत पांडेय, अभय सिंह, डॉ. रविन्द्र यादव, अक्षयलाल गुप्ता, सुनील कुमार, ज्ञान प्रकाश पाठक, प्रेम कुमार सोनी सहित सैकड़ों शिक्षक और शुभचिंतक उपस्थित रहे।

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