Education System: सिवान में नियमों को ताक पर रखकर कक्षा 9 में नामांकन: बिना TC और PEN नंबर के छात्रों का दाखिला

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जिले में करीब 1200 से अधिक निजी स्कूल, मात्र करीब 600 ही पंजीकृत

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने डीईओ से जांच व कार्रवाई की मांग की

एजुकेशन न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय। सीवान
सिवान जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। कई सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9 में बिना टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) और बिना पेन (PEN) नंबर के छात्रों का धड़ल्ले से नामांकन किए जाने की शिकायत सामने आई है। इसको लेकर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि कई निजी विद्यालयों में पढ़ रहे कक्षा 6 से 8 तक के छात्र बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के सीधे सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9 में नामांकित कर लिए जा रहे हैं। इसमें न तो ट्रांसफर सर्टिफिकेट की मांग की जा रही है और न ही छात्रों का PEN नंबर अनिवार्य रूप से लिया जा रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई PEN नंबर प्रणाली की उपयोगिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार सिवान जिले में करीब 1200 से अधिक निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से लगभग 600 विद्यालय ही शिक्षा विभाग में पंजीकृत हैं, जबकि शेष विद्यालय बिना पंजीकरण के ही वर्षों से संचालित हो रहे हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था में अनियमितता और प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन रही है।

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प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के महासचिव तथा सैनिक मॉडल स्कूल मखदूम सराय के संचालक अनवर हुसैन ने इस मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे निजी विद्यालयों की जांच कर उन्हें जल्द से जल्द पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। यदि विद्यालय नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर उन्हें बंद कराया जाए।

उन्होंने यह भी मांग की है कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9 में नामांकन के दौरान ट्रांसफर सर्टिफिकेट और PEN नंबर को अनिवार्य किया जाए। बिना इन दस्तावेजों के किसी भी छात्र का नामांकन नहीं लिया जाना चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बना रहे।

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि यदि इस तरह से नियमों की अनदेखी जारी रही तो इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि विभाग की नीतियों की भी अवहेलना होगी। इसलिए शिक्षा विभाग को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

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