Siwan: जीविका दीदियों की ‘उड़ान’: पोशाक निर्माण से बदली जिंदगी, आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

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पचरुखी के उड़ान CLF से जुड़ी महिलाओं ने ICDS यूनिफॉर्म बनाकर बढ़ाई आय, गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सीवान।
कहते हैं कि अगर अवसर और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो कोई भी अपने हालात बदल सकता है। इसका सटीक उदाहरण पेश किया है जिले के पचरुखी प्रखंड की जीविका दीदियों ने। ब्लॉक प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट के अंतर्गत संचालित ‘उड़ान CLF’ से जुड़ी इन महिलाओं ने पोशाक निर्माण के जरिए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल भी कायम की है।

पहले ये महिलाएं घरेलू कार्यों तक ही सीमित थीं और उनकी पहचान घर की जिम्मेदारियों तक ही सिमटी हुई थी। आर्थिक रूप से वे परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहती थीं। लेकिन जीविका से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। प्रशिक्षण, संसाधन और सही दिशा मिलने से उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का हुनर सीखा और इसे अपने रोजगार का माध्यम बना लिया।

उड़ान CLF के तहत जब इन दीदियों को आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए ICDS पोशाक निर्माण का ऑर्डर मिला, तो उन्होंने इसे एक अवसर के रूप में लिया। संगठित होकर टीम वर्क के साथ उन्होंने समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ यूनिफॉर्म तैयार किए। उनके काम की सराहना भी हुई और इससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला।

आज स्थिति यह है कि ये महिलाएं हर महीने अच्छी आमदनी कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और अन्य खर्च अब वे खुद संभाल पा रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अब उनमें आत्मविश्वास साफ झलकता है।

इस पहल का असर सिर्फ इन महिलाओं तक ही सीमित नहीं रहा। गांव की अन्य महिलाएं भी अब उनसे प्रेरित होकर जीविका समूह से जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं। वे भी स्वरोजगार के जरिए अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

जिला जनसंपर्क पदाधिकारी कन्हैया कुमार ने बताया कि यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि जीविका के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

पचरुखी की ये जीविका दीदियां आज न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी हैं। उनकी यह ‘उड़ान’ आने वाले समय में और भी महिलाओं को सशक्त बनने की राह दिखाएगी।

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