Health Awareness: मौसम, लापरवाही और ईयरफोन बन रहे कान की बीमारियों के बड़े कारण: डॉ. के कुमार

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दिव्य श्री डी मल्टी स्पेशलिटी एंड ईएनटी केयर सेंटर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. के कुमार से खास बातचीत

कहा— बदलते मौसम में कान, नाक और गले की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

खासकर कान में फंगस, दर्द, खुजली और सुनने की समस्या अब आम होती जा रही है।

हेल्थ न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सीवान।

बदलते मौसम और आधुनिक जीवनशैली के बीच कान, नाक और गले से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर बारिश और उमस भरे मौसम में कान में फंगस, दर्द और सुनने में दिक्कत जैसी समस्याएं ज्यादा सामने आ रही हैं। दिव्य श्री डी मल्टी स्पेशलिटी एंड ईएनटी केयर सेंटर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. के कुमार (एमएस ईएनटी) ने खास बातचीत में बताया कि वर्तमान मौसम सबसे अधिक संवेदनशील है और इस दौरान छोटी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

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डॉ. के कुमार ने कहा कि इन दिनों सबसे ज्यादा कान की बीमारियां देखने को मिल रही हैं। मरीजों में कान में भारीपन, सुनाई कम देना, दर्द, खुजली और चक्कर आने की शिकायत आम हो गई है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में नमी अधिक रहने से कान में फंगस तेजी से विकसित होता है, जो बाद में गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है।

बच्चों में बढ़ रही सर्दी, खांसी और टॉन्सिल की समस्या पर उन्होंने कहा कि फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक इसका बड़ा कारण है। साथ ही मौसम में बदलाव भी टॉन्सिल और गले की बीमारियों को बढ़ावा देता है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।

मोबाइल और ईयरफोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर डॉ. के कुमार ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में एयरफोन कान खराब होने का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। लंबे समय तक तेज आवाज में ईयरफोन का उपयोग सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है और इससे सेंसरी नर्व डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।

कान में मैल (वैक्स) साफ करने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि लोग खुद से कान की सफाई करने की गलती न करें। सेल्फ क्लीनिंग कई बार खतरनाक साबित हो सकती है। इसके लिए नजदीकी ईएनटी डॉक्टर से संपर्क करना ही सही विकल्प है।

खर्राटे, साइनस और गले की लगातार समस्याओं को लेकर उन्होंने कहा कि इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। खर्राटे कई बार गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं, जबकि साइनस अधिकतर एलर्जी के कारण होता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज की चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक मशीनों की कमी और स्थानीय स्तर पर अधूरा इलाज मरीजों की समस्या को बढ़ा देता है। ऐसे में मरीजों को जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल या विशेषज्ञ डॉक्टर से जरूर परामर्श लेना चाहिए।

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