Sawan 2026: श्रवण नक्षत्र से शुरू हुआ सावन, चारों सोमवार बनेंगे विशेष संयोग; शिव आराधना से रोग, ऋण, संतान और सुख-समृद्धि का मिलेगा आशीर्वाद

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केएमपी भारत डिजिटल से विशेष बातचीत में ज्योतिषाचार्य (डॉ.) धनंजय दुबे ने बताया- इस बार श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार अलग-अलग शुभ योग लेकर आया है, श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर मिलेगा विशेष फल।

धर्म अध्यात्म न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सिवान।

भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास का इस वर्ष का आगमन अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग के साथ हुआ है। चंद्रमा के श्रवण नक्षत्र में सावन की शुरुआत होना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत कल्याणकारी माना जा रहा है। इस बार 30 जुलाई, गुरुवार से प्रारंभ हुआ श्रावण मास 28 अगस्त, शुक्रवार को राहु के शतभिषा नक्षत्र में संपन्न होगा। पूरे माह में पड़ने वाले चारों सोमवार अलग-अलग नक्षत्रों के प्रभाव में रहेंगे, जिससे प्रत्येक सोमवार का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

केएमपी भारत डिजिटल से विशेष बातचीत में ज्योतिषाचार्य (डॉ.) धनंजय दुबे, ग्राम-कोथवा, पोस्ट-सारंगपुर, प्रखंड-दरौंधा (सिवान) ने बताया कि श्रावण मास भगवान शिव की उपासना का सर्वोत्तम समय है। इस माह में श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं मंत्र जाप करने से व्यक्ति के जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास भगवान विष्णु के वरदान से भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस पूरे महीने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से ग्रह दोष, रोग, बाधा, आर्थिक संकट तथा मानसिक तनाव में कमी आती है। इस बार प्रत्येक सोमवार अलग-अलग जीवन क्षेत्रों से जुड़ा विशेष फल देने वाला माना गया है।

पहला सोमवार : रोग, ऋण और बाधाओं से मुक्ति

3 अगस्त को पड़ने वाला पहला सोमवार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा, जो शनि का नक्षत्र है। ज्योतिषाचार्य डॉ. दुबे के अनुसार यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो व्यापार, नौकरी या पारिवारिक जीवन में लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इस दिन गंगाजल, दूध, काला तिल और दूर्वा से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। सफेद चंदन, बेलपत्र और सफेद पुष्प अर्पित करने से ऋण, शत्रु बाधा और कलह से राहत मिलने की मान्यता है।

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दूसरा सोमवार : विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश करने वालों के लिए शुभ

10 अगस्त का सोमवार आर्द्रा नक्षत्र में रहेगा, जो राहु का नक्षत्र माना जाता है। डॉ. दुबे ने बताया कि यह सोमवार विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं तथा रोजगार की तलाश में जुटे लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा। इस दिन जल में काला और सफेद तिल मिलाकर अभिषेक करना तथा “ॐ भूतेश्वराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। इससे पारिवारिक कलह, मानसिक भटकाव और करियर संबंधी बाधाओं में कमी आती है।

तीसरा सोमवार : संतान सुख और पितृ शांति का योग

17 अगस्त को नागपंचमी के दिन पड़ने वाला तीसरा सोमवार चित्रा नक्षत्र में रहेगा, जो मंगल का नक्षत्र है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह दिन संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपतियों, पितृ दोष से प्रभावित लोगों तथा कठिन परिश्रम के बावजूद सफलता नहीं मिलने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है। दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करने, भगवान शिव को चांदी का नाग-नागिन अर्पित करने तथा “ॐ गौरीशंकराय नमः” मंत्र का जाप करने से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।

चौथा सोमवार : महिलाओं के कल्याण और आरोग्य के लिए श्रेष्ठ

24 अगस्त का चौथा सोमवार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा, जो शुक्र ग्रह का नक्षत्र है। डॉ. दुबे ने बताया कि यह सोमवार विशेष रूप से महिलाओं के सुख, दांपत्य जीवन की समृद्धि तथा असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन गन्ने के रस, दूध और घी से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। साथ ही माता गौरी और भगवान शिव को सफेद पुष्पों की माला अर्पित कर “ॐ उमामहेश्वराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ रहेगा।

ज्योतिषाचार्य (डॉ.) धनंजय दुबे ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि सावन में पूजा केवल औपचारिकता न होकर श्रद्धा, संयम और सदाचार के साथ की जानी चाहिए। उनका कहना है कि सच्ची आस्था, नियमित मंत्र जाप और सेवा भाव के साथ की गई भगवान शिव की उपासना व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।

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