छठ की आस्था और बिहार की लोकसंस्कृति पर आधारित है फिल्म, दीपावली या छठ पूजा पर रिलीज होने की संभावना
स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देंगे निर्माता-निर्देशक विजय कुमार, थिएटर से जुड़े प्रतिभावान कलाकारों को भी मिलेगा मौका
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता l सीवान।
बिहार की धार्मिक आस्था, लोकसंस्कृति और पारंपरिक पर्वों को बड़े पर्दे पर जीवंत करने की पहल के तहत भोजपुरी फीचर फिल्म ‘लागल बा आसरा छठी मइया के’ का पोस्टर लॉन्च किया गया। सीवान के सिया राम मैरिज हाउस में आयोजित कार्यक्रम में फिल्म के पोस्टर का लोकार्पण जिला खेल पदाधिकारी उपेंद्र कुमार यादव एवं जदयू नेता मंसूर आलम ने संयुक्त रूप से किया। हरिवंश एंटरटेनमेंट के बैनर तले बन रही इस फिल्म के दीपावली या छठ पूजा के अवसर पर रिलीज होने की संभावना है।
छठ महापर्व की आस्था को पर्दे पर उतारने की कोशिश
फिल्म का विषय बिहार के प्रमुख लोकपर्व छठ की महिमा, धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा है। छठ पूजा बिहार की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस पर्व पर आधारित फिल्म के माध्यम से दर्शकों को अपनी परंपराओं, लोकजीवन और आस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया है। फिल्म से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी भोजपुरी दर्शकों को पसंद आएगी।
स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता देंगे विजय कुमार
फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक विजय कुमार ने कहा कि बिहार में प्रतिभाशाली कलाकारों की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें उचित मंच और अवसर देने की है। उन्होंने बताया कि हरिवंश एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनने वाली फिल्मों, धारावाहिकों और वेब सीरीज में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। खासकर थिएटर से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने की दिशा में काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कला निकेतन, सीवान के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को सिनेमा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य बिहार की कला, संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा देना है।
अनुभवी कलाकारों के साथ तकनीकी टीम भी जुड़ी
फिल्म में एचआरपी बाबू, सुजीत कुमार शर्मा, संतोष व्यास, भगवान जी पांडेय, गुलगुल और रश्मि सहित अन्य कलाकार अभिनय करते नजर आएंगे। फिल्म की तकनीकी टीम में शैलेश कुमार, रिंकू सोनी, मंटू, साबिर आलम, सीमा श्रीवास्तव और रूपनारायण श्रीवास्तव शामिल हैं।
फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों का मानना है कि भोजपुरी सिनेमा में लोकसंस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित कहानियों को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय सिनेमा की सकारात्मक पहचान मजबूत होगी। साथ ही, बिहार के स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों के लिए रोजगार एवं अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के नए अवसर भी पैदा होंगे।






