सहरसा में मनाया गया लक्ष्मीनाथ गोस्वामी का 232वां जन्मोत्सव सह महापरिनिर्वाण दिवस

Share

सरबा सद्भावना रथयात्रा निकली, सामाजिक समरसता के संदेश से गुंजायमान रहा सहरसा

डिजिटल डेस्क l केएमपी भारत न्यूज़ l भागलपुर

विकाश कुमार, सहरसा | मिथिला के सिद्ध साधक, महान संत योगीराज परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी का 232वां जन्मोत्सव सह महापरिनिर्वाण दिवस मंगलवार को श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में मनाया गया। बाबाजी कुटी, बनगांव से शुरू हुई सरबा सद्भावना रथयात्रा पूरे क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और मानव कल्याण का संदेश फैलाती रही। लक्ष्मीनाथ सेवा मिशन के तत्वावधान में आयोजित यह वार्षिक कार्यक्रम स्थानीय लोगों की आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन चुका है।


पंचोपचार पूजा के साथ हुई यात्रा की शुरुआत, जनप्रतिनिधियों ने दिखाई हरी झंडी

कार्यक्रम की शुरुआत बाबाजी कुटी बनगांव में पंचोपचार पूजा के साथ हुई। पंडित पवन कुमार झा, पंडित नुनुजी, पंडित नवीन खां, पंडित राजेंद्र बाबा और पंडित राघव ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई।
यात्रा को सहरसा नगर निगम की महापौर बैनप्रिया, डॉ. रमण झा, डॉ. अरुण खां और मिशन अध्यक्ष धनंजय कुमार झा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

धनंजय झा उर्फ भगवान जी, राजेश मंटू, राहुल बिल्टू, रोशन कुमार और राहुल बनगांव ने बताया कि रथयात्रा बनगांव से निकलकर देवना, गोपाल बरियाही, कहरा कुट्टी, सराही बाईपास होते हुए मत्स्यगंधा स्थित कुटी पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना की गई।


विभिन्न गांवों से गुजरती हुई रथयात्रा का हुआ स्वागत

मत्स्यगंधा से आगे यात्रा बलहा, गढिया, बारा, लालगंज होते हुए सिहौल स्थित बाबाजी की कुटी पहुंची, जहां इसका समापन किया गया।
हर गांव में श्रद्धालुओं ने रथयात्रा का स्वागत किया। रास्ते भर भक्तों द्वारा भजन-कीर्तन, नचारी और बाबाजी द्वारा रचित गीतों का गायन होता रहा। विभिन्न स्थानों पर बाबा के विचारों पर आधारित प्रवचन भी आयोजित किए गए।


“सामाजिक समरसता का उनका सिद्धांत आज भी मार्गदर्शक” – मिशन अध्यक्ष

लक्ष्मीनाथ सेवा मिशन के अध्यक्ष धनंजय कुमार झा ने कहा कि परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी सामाजिक समरसता और मानव एकता के प्रतीक थे।
उन्होंने कहा—
“बाबाजी का जीवन संपूर्ण समाज के उत्थान को समर्पित रहा। वे सभी जाति, धर्म और समुदाय के लोगों के द्वारा समान रूप से पूजे जाते हैं। आज भी लोग उनकी झूठी शपथ नहीं लेते, यह उनकी सिद्धि और तप की महिमा का प्रमाण है।”

उन्होंने बताया कि बाबा का जन्म और महापरिनिर्वाण दोनों विवाह पंचमी के दिन ही हुआ था, जिसे भक्त अद्भुत संयोग मानते हैं। मिशन वर्ष 2016 से लगातार इस रथयात्रा का आयोजन कर रहा है और समाज सेवा से जुड़े कई कार्यों को भी आगे बढ़ा रहा है।


महाप्रसाद और महाआरती ने बांधा भक्ति का माहौल

रथयात्रा के कहरा कुटी पहुंचने पर महाप्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद यात्रा मत्स्यगंधा और बारा कुटी होते हुए सिहौल पहुंची। यहां महाआरती, भजन संध्या और आध्यात्मिक कार्यक्रमों ने भक्तिमय वातावरण को और प्रगाढ़ बना दिया।


सैकड़ों सरबा बंधुओं की सहभागिता

कार्यक्रम में मिशन के सदस्यों—राहुल बिलटु, भरतजी, राजेश मंटू, अभिषेक सोनू, ओमजी, मनोरंजन खां, अरविंद खां, संतोष खां, संजीव, मोनू, आजाद रोशन, गौतम नाथ झा, पीयूष गोलू, सौरभ कुमार, अमित, सूरज, राजा, राकेश मिश्रा, कौशल, समीर, नीतीश चौधरी, सलिल चौधरी, चंदन झा, गोपाल मिश्रा, चुनचुन खां, रितिक कुमार और रवि शंकर सहित सैकड़ों सरबा बंधु शामिल हुए।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31