CPI(M): सीवान में पहुंचा माकपा का ‘जन आक्रोश जत्था’, केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ दिल्ली में होगा बड़ा आंदोलन

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वरिष्ठ नेता बादल सरोज बोले – श्रम संहिता, मनरेगा, बीज विधेयक और बिजली निजीकरण के खिलाफ देशभर में चल रहा जनजागरण अभियान

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सीवान |

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के केंद्रीय कमिटी के आह्वान पर केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ दिल्ली में प्रस्तावित जन आक्रोश आंदोलन के समर्थन में शुक्रवार को माकपा का जन आक्रोश जत्था सीवान पहुंचा। वरिष्ठ नेता, साहित्यकार एवं ‘लोक जतन’ के संपादक कामरेड बादल सरोज, बिहार राज्य सचिव मंडल के सदस्य कामरेड अहमद अली और कामरेड भोला प्रसाद दिवाकर के नेतृत्व में यह जत्था सारण जिले से चलकर सीपीआईएम के जिला कार्यालय न्याय मार्ग, श्रीनगर पहुंचा।

पार्टी कार्यालय पहुंचने पर जिला सचिव कामरेड फूल मोहम्मद अंसारी ने सभी नेताओं और आगंतुकों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन कामरेड मार्कण्डेय ने किया और उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का परिचय कराया। इस दौरान पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का भी सम्मान किया गया। जनवादी लेखक संघ (जलेस) के युगल किशोर दूबे, अरुण कुमार सिंह, प्रो. उपेंद्र नाथ यादव, डॉ. दयानंद सिंह, डॉ. जगन्नाथ प्रसाद और परमा चौधरी सहित अन्य लोगों ने नेतृत्व दल को फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया। https://youtu.be/x0DGM1Xfv7s?si=Lld_7cjUYSqS_moa

इसके बाद आयोजित प्रेस वार्ता में कामरेड बादल सरोज ने जन आक्रोश आंदोलन के उद्देश्यों और मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह जन आक्रोश जत्था देशभर में घूमकर आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहा है और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के बारे में लोगों को बता रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी विशेष रूप से चार प्रमुख मुद्दों को लेकर जनजागरण अभियान चला रही है।

पहला मुद्दा नई श्रम संहिताओं का है। उन्होंने कहा कि पहले जहां 29 श्रम कानून लागू थे, उनकी जगह चार श्रम संहिताएं लाई गई हैं। इससे श्रमिकों से आठ घंटे की जगह 12 से 14 घंटे तक काम लेने का रास्ता खुल जाएगा, जो श्रमिकों के शोषण और पूंजीपतियों के हित में है। दूसरा मुद्दा मनरेगा से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा में काम मांगने के कानूनी अधिकार को कमजोर कर रही है।

तीसरा मुद्दा बीज विधेयक से संबंधित है। उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक लागू होता है तो किसानों का परंपरागत रूप से बीज रखने का अधिकार खत्म हो जाएगा और उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों से बीज और कीटनाशक खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। चौथा मुद्दा बिजली क्षेत्र के निजीकरण का है। उन्होंने कहा कि सरकार बिजली वितरण का अधिकार निजी कंपनियों को सौंप रही है, जबकि सस्ती बिजली उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके तहत स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और प्राइम टाइम में बिजली की दरें कंपनियां तय करेंगी, जो सामान्य दर से अधिक होंगी। प्राइम टाइम शाम छह बजे से रात 11 बजे तक निर्धारित किया गया है।

प्रेस वार्ता के दौरान बादल सरोज ने पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत और सुरक्षित रखने में मीडिया की अहम भूमिका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पत्रकार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे।

कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, नागरिकों और आम लोगों ने भी भाग लिया। इसके बाद जन आक्रोश जत्था सीवान के रहीमपुर मठिया पहुंचा, जहां किसानों को संबोधित करते हुए नेताओं ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए जनता से सहयोग और समर्थन की अपील की।

इस मौके पर कामरेड अर्जुन यादव, कन्हैया चौधरी, लाइची हरिराही, इमाम हुसैन, गुलाब चंद गुप्ता, बिपिन बिहारी सिंह, शीला कुमारी सहित कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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