Saran: पर्यवेक्षण गृह में व्यवस्था सुधार पर जिलाधिकारी सख्त; बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर दिए कड़े निर्देश

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छोटे-बड़े बच्चों को अलग रखने की व्यवस्था की समीक्षा

सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

सारण, संवाददाता।

जिले में संचालित पर्यवेक्षण गृह सह बाल सुधार गृह की व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने मंगलवार को औचक निरीक्षण किया। समाज कल्याण विभाग, बिहार के अंतर्गत संचालित इस गृह में पहुंचकर उन्होंने बच्चों के रहन-सहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया कि सेक्शनवार और विषयवार योग्य शिक्षकों का चयन कर रोस्टर तैयार किया जाए, ताकि गृह में रह रहे बच्चों के लिए नियमित कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

जिलाधिकारी ने विगत निरीक्षण में दिए गए निर्देशों की प्रगति की भी समीक्षा की। इस दौरान यह पाया गया कि 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को बड़े बच्चों से अलग रखने के निर्देश का पालन किया गया है। छोटे बच्चों के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था की गई है, जिससे उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस पहल की सराहना करते हुए जिलाधिकारी ने इसे और बेहतर तरीके से लागू करने का निर्देश दिया।

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स्वच्छता को लेकर भी जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने परिसर, भवन के अंदरूनी हिस्सों तथा रसोईघर (किचेन) को नियमित रूप से साफ-सुथरा रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई बच्चों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी होती है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साथ ही भोजन की गुणवत्ता और पोषण स्तर की भी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि गृह में रह रहे सभी बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी या समस्या का समय रहते समाधान हो सके।

निरीक्षण के दौरान बाल संरक्षण पदाधिकारी, पर्यवेक्षण गृह के अधीक्षक तथा सुरक्षा गार्ड उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाकर कार्य करने और बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

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