Youth Rights: शिक्षा व्यवस्था आईसीयू में, छात्रों की आवाज़ अब सड़क से सदन तक पहुंचेगी: कांग्रेस

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सीवान में कांग्रेस का संवाददाता सम्मेलन, 25 जून से 9 अगस्त तक चलेगा ‘छात्रों की गूंज’ अभियान; सस्ती शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षा और रोजगार की उठी मांग

पॉलिटिकल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता। सीवान |
जिला कांग्रेस कार्यालय में गुरुवार को ‘छात्रों की गूंज’ आंदोलन को लेकर संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर शिक्षा प्रणाली को कमजोर करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह अभियान 25 जून से शुरू होकर 9 अगस्त, क्रांति दिवस तक चलेगा और छात्रों के मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि आज देश की शिक्षा व्यवस्था आईसीयू में पहुंच चुकी है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 3000 छात्रों में से मात्र एक आईएएस, 30 आईआईटी और 180 डॉक्टर बनते हैं, जिससे स्पष्ट है कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली चयन से अधिक अस्वीकृति का माध्यम बन गई है।

जिला उपाध्यक्ष शशि कुमार ने कहा कि भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था और लगातार हो रहे पेपर लीक ने युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने मानसिक दबाव में अपनी जान गंवाई है, जो बेहद चिंताजनक है।

अति पिछड़ा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राधेश्याम शर्मा ने कहा कि महंगी फीस, पेपर लीक और परीक्षा में धांधली ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ ऐसे युवाओं की आवाज बनेगा जिनके सपने इस व्यवस्था ने तोड़ दिए हैं।

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मैरवा प्रखंड अध्यक्ष पवन यादव ने दावा किया कि देश में नीट, जेईई, एसएससी, यूपीएससी और रेलवे जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी में हर साल करोड़ों परिवार भारी आर्थिक बोझ उठा रहे हैं, जबकि यह जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए।

युवा नेता अमित कुशवाहा और पचरूखी प्रखंड अध्यक्ष विकास तिवारी ने कहा कि छात्रों को रोजगार, पारदर्शिता और सुरक्षित भविष्य चाहिए, लेकिन सरकार सवाल पूछने वालों को दबाने का काम कर रही है।

सदर प्रखंड अध्यक्ष कृष्णकांत गुप्ता ने कहा कि सरकार विरोध की हर आवाज को देशद्रोह और अराजकता से जोड़ने की राजनीति कर रही है। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यह अभियान छात्रों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने, परीक्षा प्रणाली को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

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