बिहार पब्लिक स्कूल में जागृति मंच ने मनाई मुंशी प्रेमचंद की जयंती
‘आजादी के मायने और प्रेमचंद’ विषय पर हुआ विचार-विमर्श

जनगीत व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
साहित्य संस्कृति न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता l सिवान।
बिहार पब्लिक स्कूल, सिवान के परिसर में जागृति मंच के तत्वावधान में महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘आजादी के मायने और प्रेमचंद’ रहा। इस दौरान साहित्य, समाज, स्वाधीनता, स्वराज और आर्थिक स्वतंत्रता के विभिन्न पहलुओं पर वक्ताओं ने विचार रखे। जनगीत और स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। https://youtu.be/-yVeKbqE6Yo?si=5rkOD_qW74i9hMOj


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विकल्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रवींद्र कुमार रवी रहे। उन्होंने बच्चों को सरल भाषा में आजादी और प्रेमचंद के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता समझाई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ आर्थिक स्वतंत्रता भी जरूरी है। आर्थिक स्वतंत्रता के अभाव में राजनीतिक आजादी अधूरी रह जाती है। उन्होंने प्रेमचंद के विभिन्न उपन्यासों और कहानियों के उदाहरण देते हुए समाज की वास्तविक परिस्थितियों और आम आदमी के जीवन से जुड़े मुद्दों को रेखांकित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार पब्लिक स्कूल के निदेशक एवं विकल्प के राष्ट्रीय सचिव विनोद प्रसाद सिन्हा ने की। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य अंकित कुमार द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। उन्होंने प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास ‘गोदान’ के माध्यम से उनके साहित्य में मौजूद सामाजिक सरोकारों और आम जनजीवन की समस्याओं पर प्रकाश डाला। इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. रवींद्र कुमार रवी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
स्वाधीनता और स्वराज के अंतर को समझाया
मुख्य वक्ता डॉ. ब्रजनंदन किशोर ने प्रेमचंद की चर्चित रचनाओं ‘नमक का दरोगा’ और ‘बड़े घर की बेटी’ के संदर्भ में उनके साहित्यिक और सामाजिक दृष्टिकोण को समझाया। उन्होंने स्वाधीनता और स्वराज के बीच के अंतर को बारीकी से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य में केवल तत्कालीन भारत की तस्वीर नहीं है, बल्कि उसमें उस भारत की कल्पना भी दिखाई देती है, जो सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में आगे बढ़े।

कार्यक्रम में साहेबगंज से आए नारायण जी, मुजफ्फरपुर से आए डॉ. नीरज कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों की आवाज को मजबूती दी। उनकी कहानियों और उपन्यासों में भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है।

अंशिका के आलेख ने बांधा ध्यान
कार्यक्रम के दौरान अंशिका कुमारी द्वारा लिखित आलेख का वाचन किया गया। आलेख में प्रेमचंद के साहित्य, उनके सामाजिक दृष्टिकोण और विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। जागृति मंच की ओर से जनगीत की प्रस्तुति दी गई। वहीं बिहार पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों की अतिथियों और दर्शकों ने सराहना की।

कार्यक्रम का सफल संचालन दीपक कुमार ने किया। अंत में मोहित मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अतिथियों, वक्ताओं, जागृति मंच के सदस्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश दिया गया कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं और उनके विचार वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।







