हनुमान मंदिर विदूर्ति हाता परिसर में आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवियों, श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों की रह रही सक्रिय भागीदारी
जनसहयोग से अभियान को मिल रही नई ऊर्जा
धर्म अध्यात्म डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संजीव कुमार l पटना/सिवान।
सिवान में सेवा, भक्ति और सामाजिक समर्पण का अनूठा संगम बन चुके “मां का प्रसाद” वितरण अभियान का दूसरा सप्ताह शनिवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। कम्युनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट के नेतृत्व में मिलन सेवा समिति हनुमान मंदिर विदूर्ति हाता परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं, समाजसेवियों और स्वयंसेवकों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। अभियान के दूसरे सप्ताह में 500 से अधिक जरूरतमंदों को पवित्र प्रसाद वितरित किया गया, जिससे समाज में सेवा और सहयोग का संदेश और अधिक व्यापक रूप से पहुंचा।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। प्रसाद वितरण के साथ-साथ लोगों ने मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए इस पहल की सराहना की। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार के अभियान समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के लोगों को न केवल सहयोग प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें सम्मान और अपनत्व का एहसास भी कराते हैं।


अभियान के आयोजकों ने बताया कि “मां का प्रसाद” केवल भोजन वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज में करुणा, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का एक प्रयास है। जनसहयोग और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी के कारण यह अभियान लगातार विस्तार पा रहा है और लोगों का विश्वास भी बढ़ रहा है।

दूसरे सप्ताह के कार्यक्रम में भाजपा नेत्री एवं समाज सेविका श्रीमती लीशा लाल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए इस पहल की सराहना की और कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना ही सच्ची सेवा है।

वहीं आर्य समाज मंदिर के सचिव संजीव कुमार, रोटरी क्लब के सचिव संजय कुमार, गायत्री परिवार के सदस्य मंटू शाह, पर्वती गैस एजेंसी के संचालक अशोक कुमार उर्फ बबल जी, समाजसेवी गोपीचंद पासवान एवं चंदेश्वर पासवान सहित अनेक गणमान्य लोगों ने तन, मन और धन से सहयोग देकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयोजन समिति ने सभी सहयोगियों, स्वयंसेवकों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जरूरतमंदों तक प्रसाद पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है। समिति ने बताया कि आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक सहायता और सम्मान पहुंचाया जा सके।


कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” और इसी भावना के साथ इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।







