काजी-ए-शहर मुफ्ती इरफान चिश्ती ने पढ़ाई नमाज, कुर्बानी के जरिए त्याग और इंसानियत का दिया संदेश
धर्म अध्यात्म डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता l सिवान :
शहर समेत जिले के ग्रामीण इलाकों में गुरुवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व पूरे धार्मिक उत्साह, भाईचारे और अकीदत के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने नए कपड़े पहनकर अल्लाह की इबादत की और नमाज के बाद एक-दूसरे से गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी। पर्व को लेकर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में खास उत्साह देखने को मिला। https://youtu.be/RZxXDE3ngDI?si=PlZTKKsjPtnvjBFb

शहर के नया किला नवलपुर स्थित ईदगाह में काजी-ए-शहर मुफ्ती इरफान चिश्ती ने सुबह करीब साढ़े सात बजे बकरीद की नमाज अदा कराई। वहीं शहर की अन्य मस्जिदों में सुबह छह बजे से लेकर साढ़े सात बजे तक अलग-अलग समय पर नमाज पढ़ी गई। नमाज के दौरान पूरे इलाके में अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी गई।

नमाज से पहले अपने तकरीर में मुफ्ती इरफान चिश्ती ने बकरीद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पर्व पैगंबर हजरत इब्राहिम की महान कुर्बानी, त्याग और अल्लाह के प्रति अटूट वफादारी की याद दिलाता है। उन्होंने बताया कि जब अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा ली और अपने सबसे प्यारे बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का हुक्म दिया, तब उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अल्लाह की रजा के लिए अपने बेटे को कुर्बान करने का फैसला कर लिया। लेकिन उनकी सच्ची नीयत और ईमानदारी को देखकर अल्लाह ने हजरत इस्माइल को सुरक्षित रखते हुए उनकी जगह एक दुंबे की कुर्बानी कबूल कर ली।

मुफ्ती ने कहा कि उसी घटना की याद में दुनिया भर के मुसलमान जिलहिज्जा महीने की 10 तारीख को ईद-उल-अजहा मनाते हैं और नमाज के बाद बकरे, भेड़ अथवा अन्य जायज जानवरों की कुर्बानी देते हैं। उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग और जरूरतमंदों की मदद का संदेश भी देती है। कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों एवं मित्रों के लिए तथा तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है। इससे समाज में भाईचारा और समानता की भावना मजबूत होती है।

बकरीद को लेकर जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क और अलर्ट नजर आया। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जबकि प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। प्रशासन की सक्रियता और लोगों के सहयोग से पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
दिनभर लोगों के घरों में मेहमानों के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा। बच्चों ने जहां पर्व का आनंद लिया, वहीं बुजुर्गों ने आपसी सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखने की अपील की। पूरे जिले में बकरीद का त्योहार धार्मिक श्रद्धा, सामाजिक सद्भाव और खुशियों के माहौल के बीच संपन्न हुआ।







