BIG breaking: नगर परिषद के निलंबित ईओ ने लगाया 76 योजनाओं पर फर्जी कार्यादेश का आरोप, कहा– केवल 10-15 योजनाओं पर ही किए थे हस्ताक्षर

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नगर परिषद सिवान में योजनाओं की संचिकाएं गायब, फर्जी हस्ताक्षर की आशंका; डीएम से जांच व एफआईआर की मांग

सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना :

कृष्ण मुरारी पांडेय l सिवान

सीवान नगर परिषद में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अब एक बड़ा विवाद सामने आ गया है। निलंबित कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) अनुभूति श्रीवास्तव ने 76 योजनाओं को स्वीकृति देने और कार्यादेश जारी करने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उन्होंने केवल 10 से 15 योजनाओं पर ही हस्ताक्षर किए थे। शेष कार्यादेशों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर होने की आशंका जताई गई है।

वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी के अनुसार, पूर्व ईओ के कार्यकाल में कुल 76 योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई

नगर परिषद सिवान के वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी विपिन कुमार के अनुसार, पूर्व ईओ अनुभूति श्रीवास्तव के कार्यकाल में कुल 76 योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई थी। इन योजनाओं का विस्तृत विवरण भी जारी किया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन 76 योजनाओं से संबंधित संचिकाएं नगर परिषद कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं हैं। संचिकाओं के गायब होने को गंभीर मानते हुए 30 दिसंबर 2025 को कार्यालय सहायक रंजीत कुमार शर्मा और कनीय अभियंता ओम प्रकाश सुमन के आवास पर छापेमारी भी की गई थी।

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निलंबित ईओ ने 30 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी सिवान को पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट किया

इधर, निलंबित ईओ अनुभूति श्रीवास्तव ने 30 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी सिवान विवेक रंजन मैत्रेय को पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पत्र में उन्होंने कहा है कि 4 अक्टूबर 2025 को नगर परिषद सिवान के तीनों कनीय अभियंताओं को केवल 10 से 15 विभागीय योजनाओं का ही कार्यादेश कार्यालय कर्मियों द्वारा संचिकाएं प्रस्तुत किए जाने के बाद हस्ताक्षरित किया गया था। उन्होंने साफ तौर पर लिखा है कि यदि शेष किसी कार्यादेश का उल्लेख निर्गत पंजी में दर्ज है, तो वह या तो उनके द्वारा हस्ताक्षरित नहीं होगा या फिर उस पर उनका फर्जी हस्ताक्षर होगा।

अनुभूति श्रीवास्तव ने अपने पत्र में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही, यदि उनके नाम से जारी किए गए अन्य कार्यादेश पाए जाते हैं, तो उन्हें निरस्त करने का आदेश देने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि सच्चाई सामने लाने के लिए हस्ताक्षर की फोरेंसिक जांच भी आवश्यक है।

मामले को लेकर शहर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल

मामले को लेकर शहर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल है। सिवान जिला के वरिष्ठ अधिवक्ता ईस्टदेव तिवारी, जन सुराज पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष इंतखाब अहमद, एमएम कॉलोनी निवासी समाजसेवी आफताब आलम और महादेव निवासी समाजसेवी अभिषेक आनंद ने जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। इन लोगों ने दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की भी मांग की है।

अब निगाहें जिलाधिकारी पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। यदि फर्जी हस्ताक्षर और संचिकाओं के गायब होने की पुष्टि होती है, तो नगर परिषद में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।

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