Mushaira Night: सिवान में मुशायरा-कवि सम्मेलन की महफिल सजी, शेरो-शायरी पर देर रात तक गूंजती रही वाहवाही

Share

ईद मिलन, होली मिलन और बिहार दिवस के अवसर पर आयोजन; उस्ताद शायर कमर सिवानी की अध्यक्षता, डॉ जाहिद सिवानी का संचालन

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सिवान :
सिवान शहर में साहित्य और अदब की खुशबू उस वक्त पूरे शबाब पर नजर आई, जब बज्मे शम-ए-अदब पुराना किला के तत्वाधान में भव्य मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन ईद मिलन, होली मिलन और बिहार दिवस के अवसर पर किया गया, जिसमें शहर के नामचीन शायरों और कवियों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और संचालक ने संयुक्त रूप से किया।

मुशायरा की अध्यक्षता उस्ताद शायर कमर सिवानी ने की, जबकि संचालन युवा मजाहिया शायर डॉ जाहिद सिवानी ने अपनी खास अंदाज में किया। मुख्य अतिथि के रूप में राज सिवानी और विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर डॉ जिया कुतबी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम के कन्वेनर अरशद सिवानी ने सभी अतिथियों और शायरों का खैरमकदम करते हुए आभार व्यक्त किया।

मुशायरे की शुरुआत रेहान मुस्तफाबादी के नातिया कलाम से हुई, जिसने माहौल को पूरी तरह अदबी रंग में रंग दिया। इसके बाद एक से बढ़कर एक शायरों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कमर सिवानी के शेर “तुम्हारी प्यास तो लब से न बढ़ सकी आगे, हमारी प्यास समंदर खंगाल आई है” पर जमकर तालियां बजीं। वहीं मोइज बहमन बरवी ने “वो जख्मों के बदले दुआ दे रहा है, उसे क्या मिला और क्या दे रहा है” पढ़कर खूब वाहवाही लूटी।

डॉ जिया कुतबी ने भावपूर्ण अंदाज में “हर लफ्ज़ तो आंसू है बर्बाद कहानी की, फरियाद तेरी सुनकर क्यों आंख न तर होगी” सुनाया, जिसने श्रोताओं को भावुक कर दिया। वहीं डॉ जाहिद सिवानी ने अपने व्यंग्यात्मक अंदाज में “एम ए की डिग्री ले के भी जाहिद मैं रात दिन, टोटो चला रहा हूं कोई आ के रोक ले” पढ़कर माहौल में हास्य का रंग घोल दिया।

रेहान मुस्तफाबादी, खलीकुज्जमान खलीक, राज सिवानी और मुश्ताक अहमद मुश्ताक सहित अन्य शायरों ने भी अपनी रचनाओं से दर्शकों का दिल जीत लिया। सफर मखदुमी और अरशद सिवानी के कलाम ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम में डॉ परविंदर कुमार शुक्ला, डॉ असगर सिवानी, हैदर वारसी, कमाल मीरापुरी, मोहम्मद यूनुस, नासिर, मोहम्मद इरफान, शमशेर अली और गुड्डू बाबू सहित कई अन्य साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। पूरी शाम श्रोता शेरो-शायरी की दुनिया में डूबे नजर आए और हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज सुनाई देती रही।

देर शाम तक चले इस शानदार मुशायरे और कवि सम्मेलन का समापन आयोजकों द्वारा किया गया। कार्यक्रम ने सिवान के साहित्यिक माहौल को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दिया।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031