“कार्ल मार्क्स और वर्तमान समय” विषय पर चर्चा; वक्ताओं ने बताया—आज भी प्रासंगिक हैं मार्क्स के विचार, मजदूरों-किसानों की एकता पर दिया जोर
डिजिटल डेस्क l केएमपी भारत l पटना
सीवान l संवाददाता
दुनिया के मेहनतकशों और मजलूमों को उनके अधिकारों की लड़ाई का रास्ता दिखाने वाले क्रांतिकारी समाजवादी दार्शनिक कार्ल मार्क्स की जयंती के अवसर पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के तत्वावधान में न्याय मार्ग, श्रीनगर स्थित पार्टी कार्यालय में “कार्ल मार्क्स और वर्तमान समय” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता कामरेड डॉ. दयानंद सिंह ने की।
संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए कामरेड मार्कण्डेय ने विषय प्रवेश रखा। उन्होंने कहा कि मार्क्स पहले ऐसे विचारक थे जिन्होंने पूंजीवाद का गहराई से विश्लेषण किया और स्पष्ट किया कि पूंजीपति वर्ग का मुख्य उद्देश्य पूंजी, तकनीक और मुनाफा होता है, जिसके कारण मजदूरों का शोषण बढ़ता है। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में रहते हुए भी मार्क्स ने भारत में अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण का सटीक वर्णन किया था।

उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन के दौरान भाप इंजन और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से भारत के पारंपरिक कृषि और शिल्प उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया गया। इस पर हस्तक्षेप करते हुए अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अंग्रेजी घुसपैठ ने भारतीय करघा उद्योग को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया, जिससे स्थानीय कारीगरों की आजीविका समाप्त हो गई।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने मार्क्स के श्रम सिद्धांत पर भी चर्चा की। बताया गया कि कच्चे माल से तैयार होने वाले अंतिम उत्पाद की कीमत में जो अंतर होता है, वही श्रमिक का श्रम होता है, जिसे पूंजीपति अपने लाभ के रूप में बेचता है। यही असल शोषण की जड़ है। इस संदर्भ में मार्क्स के प्रसिद्ध आह्वान—“दुनिया के मजदूरों एक हो, तुम्हारे पास खोने के लिए जंजीरों के सिवाय कुछ नहीं है”—को भी दोहराया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता कामरेड रविन्द्र सिंह ने कहा कि भारत में पूंजीवाद का विकास असंतुलित रहा है, जहां सामंतवाद और पूंजीवाद का मिश्रण देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक व्यवस्था एकध्रुवीय से बहुध्रुवीय हो रही है, लेकिन भारत की नीतियां अब भी अमेरिका के प्रभाव में दिखाई देती हैं।
सीपीआईएम के जिला सचिव कामरेड फूल मोहम्मद अंसारी ने कहा कि पूंजीवाद ने पहले सामंतवाद को खत्म किया और अब यह लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों को भी निगलने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अमेरिकी आर्थिक मंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि संकट के समय दुनिया फिर से मार्क्स के विचारों की ओर लौटती है।
किसान नेता कामरेड अर्जुन यादव ने वर्तमान राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज धर्म और जाति के मुद्दों ने किसानों और मजदूरों के असली सवालों को पीछे धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र अब “सरकारी लोकतंत्र” बनकर रह गया है।
संगोष्ठी को संबोधित करने वालों में किसान नेता कामरेड श्रीराम सिंह, युगल किशोर दूबे, परमा चौधरी, अजय कुमार, डॉ. जगन्नाथ प्रसाद, नोएडा सीटू के उपाध्यक्ष भरत प्रसाद डैंजर, अख्तर हुसैन, इमाम हुसैन और दिलीप कुमार शामिल थे।
कार्यक्रम के अंत में कार्ल मार्क्स को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस अवसर पर शीला देवी, दुर्गा कुमारी, विभूति राम, बिपिन बिहारी सिंह और धर्मेंद्र गुप्ता सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।






