Social Harmony: जीरादेई में होली पर ‘पितरौ ध्यान लोकस’ मंदिर निर्माण स्थल पर पूजा-अर्चना, ‘पूज्य माता-पिता नमः’ मंत्र का हुआ जाप

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जीरादेई के विजयीपुर में बन रहा अनोखा मंदिर, माता-पिता के सम्मान और सामाजिक समरसता का संदेश

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

जीरादेई (सिवान)। संवाददाता
होली जैसे पावन पर्व के अवसर पर जीरादेई प्रखंड के विजयीपुर गांव स्थित ‘पितरौ ध्यान लोकस’ मंदिर के निर्माण स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला। यहां श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम पूजा-अर्चना कर ‘पूज्य माता-पिता नमः’ मंत्र का जाप किया और समाज में माता-पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने वरिष्ठ पत्रकार धनंजय मिश्र के आलेख को पूर्ण करने का भी संकल्प लिया, जिसमें इस अनूठे मंदिर के निर्माण और उसके सामाजिक उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

यह मंदिर देश और दुनिया के लिए एक अनोखा सद्प्रयास माना जा रहा है। सामाजिक सद्भावना और समरसता के लिए निरंतर कार्य करने वाले जाने-माने शिक्षाविद् डॉ. कृष्ण कुमार सिंह इस आदर्श मंदिर के संस्थापक हैं। वे देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के गृहग्राम जीरादेई प्रखंड के विजयीपुर गांव के मूल निवासी हैं। उनके मार्गदर्शन में नव नामित पंचशील नगर विजयीपुर में इस भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू किया गया है।

मंदिर निर्माण को लेकर आयोजित बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया और इसे जनभागीदारी से पूरा करने का संकल्प लिया। डॉ. सिंह ने बताया कि यह मंदिर जगत के समस्त माता-पिता की स्मृति को समर्पित होगा। उनका कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए और उन्हें साक्षात देवी-देवता के समान मानकर सम्मान, सेवा और विनम्रता के साथ उनकी देखभाल करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में माता-पिता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ में यह परंपरा धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर माता-पिता को उपेक्षा और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। समाज में पनप रही इस कुप्रवृत्ति को समाप्त करने और नई पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से इस मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया गया है।

डॉ. सिंह द्वारा स्थापित “पहचान” संस्था के बैनर तले वर्षों से सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2005 में स्थापित और 12 मई 2010 को पंजीकृत इस संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष 1 मई और 31 दिसंबर को माता-पिता की स्मृति में पूजा-अर्चना, लिखित वंदना, झंडोत्तोलन और पौधरोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

संस्था युवाओं को अपने जीवित माता-पिता के नाम पर धनकोष बनाने के लिए भी प्रेरित करती है, ताकि उस राशि से समाज के गरीब, बीमार और असहाय माता-पिता की सहायता की जा सके।

अंत में आयोजकों ने जनमानस से अपील की कि इस मंदिर के निर्माण में अपने सुझाव और सहयोग देकर इसे एक सामाजिक आंदोलन का रूप दें, ताकि समाज में माता-पिता के सम्मान की परंपरा और मजबूत हो सके।

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