Gorakhpur News: रेलवे लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण पर बढ़ा असंतोष: बाजार दर से मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने सौंपा ज्ञापन

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2016 से सर्किल रेट नहीं बढ़ने का आरोप, 15 दिन में संशोधन नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

घनश्याम यादव। गोरखपुर :
सहजनवा–दोहरीघाट प्रस्तावित रेलवे लाइन परियोजना को लेकर प्रभावित किसानों और ग्रामीणों में मुआवजे को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। उचित दर पर भूमि अधिग्रहण की मांग को लेकर किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए बाजार मूल्य के अनुसार सर्किल रेट निर्धारित करने की मांग की है।

चिल्लूपार रेलवे मुआवजा संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने भूमि अध्याप्ति अधिकारी को ज्ञापन देकर अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित रेलवे लाइन निर्माण से बड़हलगंज ब्लॉक के तीहामुहम्मदपुर, नदीवा, बेदौली, दुबौलीपुरा, सरस्वती, चौतिसा, पैकोली अमानचक और कुशभौना समेत कई गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिले में वर्ष 2016 के बाद से सर्किल रेट में कोई वृद्धि नहीं की गई है। जबकि राजस्व नियमों के अनुसार हर तीन वर्ष में सर्किल रेट की समीक्षा और संशोधन किया जाना आवश्यक है। किसानों का कहना है कि वर्तमान सर्किल रेट जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार उर्फ बबलू राय के नेतृत्व में काशीनाथ राय, उदय प्रताप यादव, उपेंद्र नाथ राय, हरिकेश राय, शैलेन्द्र राय उर्फ कक्कू, रविन्द्र राय, प्रदीप ओझा, मनीष राय, लक्ष्मी राय, राजेश पांडेय, जोखू प्रसाद यादव और कैलाश शर्मा सहित बड़ी संख्या में किसानों ने ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर सर्किल रेट में संशोधन कर बाजार दर के अनुरूप मुआवजा तय नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। किसानों का कहना है कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनकी जमीन का उचित मूल्य मिलना उनका अधिकार है।

इस मामले में प्रशासन का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की जाएगी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सभी प्रभावित पक्षों से संवाद स्थापित कर संतुलित और न्यायसंगत समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

फिलहाल, मुआवजे को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। आने वाले दिनों में यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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