Art Exhibition BHU: नव संवत्सर 2083 पर BHU में अंतरराष्ट्रीय कला शिविर का आगाज, 54 कलाकार जुटे

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पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर ने किया उद्घाटन, 6 अप्रैल तक चलेगा शिविर; विभिन्न देशों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगेगी

सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l वाराणसी

संवाददाता। वाराणसी।

हिंदू नव संवत्सर 2083 के स्वागत में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के महिला महाविद्यालय परिसर में गुरुवार को एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कला शिविर एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। चित्रकला विभाग, महिला महाविद्यालय, बीएचयू; राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश; संस्कार भारती, विश्वविद्यालय इकाई, वाराणसी एवं इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम 2 से 6 अप्रैल 2026 तक चलेगा।

कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री से सम्मानित प्रो. मंगला कपूर ने दोपहर 12 बजे किया। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय कला परंपरा की समृद्धि और नव संवत्सर के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन कलाकारों को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं और भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनते हैं।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रीता सिंह तथा संस्कार भारती, काशी प्रांत के संगठन मंत्री दीपक शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. सरोज रानी ने अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सभी अतिथियों और कलाकारों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनील कुमार सिंह कुशवाहा ने प्रभावी ढंग से किया, जबकि डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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कार्यक्रम की सांस्कृतिक शुरुआत श्रीमती अभ्रदिता बैनर्जी के सुमधुर ध्येयगीत और वंदेमातरम गायन से हुई, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति और सांस्कृतिक भावनाओं से ओत-प्रोत कर दिया।

इस अंतरराष्ट्रीय चित्रकला शिविर में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मॉरीशस और दक्षिण कोरिया से कुल 54 कलाकारों ने भाग लिया है। कलाकार आगामी दिनों में नव संवत्सर, भारतीय संस्कृति, प्रकृति और समकालीन विषयों पर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करेंगे। आयोजकों के अनुसार, यह शिविर न केवल कलाकारों के बीच संवाद और अनुभव साझा करने का मंच है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा।

शिविर में तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी आजाद कला वीथिका, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में लगाई जाएगी, जहां कला प्रेमियों को विविध शैली और विषयों की झलक देखने को मिलेगी।

कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद, डॉ. दीक्षा जायसवाल, डॉ. जयंती मंडी, ध्रुव पांडेय सहित संस्थान के शोध छात्रों का विशेष योगदान रहा। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन से विद्यार्थियों को भी कला के विभिन्न आयामों को समझने और सीखने का अवसर मिलता है।

नव संवत्सर के इस सांस्कृतिक उत्सव ने वाराणसी में कला और परंपरा के संगम का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आने वाले दिनों में और अधिक रचनात्मक गतिविधियों को प्रेरित करेगा।

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