एक माह तक चलेगा कैंप, विद्यार्थियों और युवाओं को सिखाई जाएगी आत्मरक्षा व स्वस्थ जीवनशैली की तकनीक
स्पोर्ट्स न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता l सिवान
बदलती जीवनशैली, बढ़ते मानसिक तनाव और युवाओं में घटती शारीरिक सक्रियता के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में सिवान में एक सराहनीय पहल की जा रही है। ग्रीष्मावकाश के अवसर पर सिवान योग एसोसिएशन एवं सिवान डिस्ट्रिक्ट ताईक्वान डो एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 21 मई 2026 से एक माह का निःशुल्क योग एवं ताईक्वान डो (मार्शल आर्ट्स) प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण शिविर शहर के वीएम हाई स्कूल परिसर में प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 7 बजे तक संचालित होगा, जो 21 जून 2026 तक चलेगा।

आयोजकों ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं का अधिकांश समय मोबाइल, टीवी और डिजिटल उपकरणों के बीच गुजर रहा है, जिससे शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में योग, प्राणायाम और मार्शल आर्ट्स जैसी विधाएं न केवल शरीर को स्वस्थ रखती हैं, बल्कि आत्मविश्वास और अनुशासन भी विकसित करती हैं।
प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को योग, प्राणायाम, एरोबिक एक्सरसाइज और ताईक्वान डो की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कराया जाएगा। इसके साथ ही आत्मरक्षा से जुड़ी विशेष तकनीकों की भी जानकारी दी जाएगी, ताकि विशेषकर छात्राएं और महिलाएं आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी बन सकें। प्रशिक्षकों द्वारा बताया जाएगा कि नियमित योग और व्यायाम से स्मरण शक्ति बढ़ती है, मन एकाग्र रहता है और पढ़ाई में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
शिविर के आयोजकों का कहना है कि “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है” केवल कहावत नहीं, बल्कि जीवन का वास्तविक सत्य है। जब व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, तभी उसके भीतर सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और वह समाज व राष्ट्र के निर्माण में बेहतर योगदान दे सकता है।

इस प्रशिक्षण शिविर में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थी, युवा, महिलाएं और आम नागरिक भाग ले सकेंगे। शिविर पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। शिविर के समापन के बाद सभी प्रतिभागियों को संघ की ओर से प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
आयोजकों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को इस प्रकार की स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों से जोड़ें, ताकि उनमें अनुशासन, आत्मरक्षा और सकारात्मक जीवनशैली का विकास हो सके।






