Gaushala Case: चार दिन बाद भी सन्नाटा: गोपाल कृष्ण गौशाला प्रबंधन ने नहीं दिया SDO के नोटिस का जवाब, तीन दिन का अल्टीमेटम खत्म

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तीन दिन का अल्टीमेटम खत्म, 10 साल के कागजात अब तक नहीं सौंपे, प्रशासनिक सख्ती के बावजूद अनदेखी

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय। सिवान।
श्री गोपाल कृष्ण गौशाला सिवान के प्रबंधन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) सिवान सदर द्वारा जारी पत्रांक 105, दिनांक 09 जनवरी 2026 के बाद चार दिन बीत जाने के बावजूद गौशाला प्रबंधन की ओर से न तो कोई जवाब दिया गया है और न ही मांगे गए कागजात उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासनिक निर्देशों की इस खुली अनदेखी को गंभीरता से लिया जा रहा है।

दरअसल, 02 जनवरी 2026 को आयोजित गौशाला की प्रबंध समिति की बैठक की कार्यवाही के क्रम में एसडीओ कार्यालय ने ज्ञापांक-13, दिनांक 02.01.2026 जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया था कि बैठक से संबंधित और वित्तीय मामलों से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज तीन दिनों के भीतर कार्यालय में समर्पित किए जाएं। इसके बावजूद समयसीमा समाप्त होने के बाद भी प्रबंधन ने कोई पहल नहीं की।

10 वर्षों का हिसाब मांगा गया
एसडीओ कार्यालय द्वारा गौशाला प्रबंधन से वर्ष 2015 से 2025 तक के सभी रिकॉर्ड की मांग की गई है। इसमें पिछले दस वर्षों की बैठकों के सभी एजेंडा, अद्यतन रोकड़ बही, बिल बुक, बैंक स्टेटमेंट, आय-व्यय विवरणी तथा गौशाला के सभी सदस्यों की विस्तृत सूची शामिल है। सदस्यों की सूची में नाम, पिता का नाम, पता, मोबाइल नंबर, सदस्यता तिथि और सदस्यता शुल्क का विवरण अनिवार्य रूप से मांगा गया है।

नोटिस में जताई गई थी कड़ी नाराजगी
09 जनवरी को जारी पत्र में एसडीओ ने स्पष्ट शब्दों में उल्लेख किया था कि बार-बार निर्देश के बावजूद कागजात उपलब्ध नहीं कराना प्रबंधन की गलत मंशा और कार्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। इसी के साथ गौशाला प्रबंधन को तीन दिनों का अंतिम मौका देते हुए चेतावनी दी गई थी कि तय समय के भीतर कागजात और स्पष्टीकरण नहीं देने पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

अल्टीमेटम के बाद भी चुप्पी
एसडीओ के अल्टीमेटम को समाप्त हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन गौशाला प्रबंधन की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। न तो मांगे गए दस्तावेज जमा किए गए हैं और न ही देरी को लेकर कोई स्पष्टीकरण दिया गया है। इससे प्रशासनिक हलकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना
सूत्रों की मानें तो गौशाला प्रबंधन द्वारा लगातार आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया जा रहा है। सार्वजनिक हित और दान पर आधारित संस्था होने के बावजूद वित्तीय पारदर्शिता न दिखाना प्रशासन की नजर में गंभीर मामला माना जा रहा है। ऐसे में अब प्रशासन द्वारा अगला कदम उठाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने न केवल गोपाल कृष्ण गौशाला के प्रबंधन पर, बल्कि शहर की अन्य गौशालाओं और सामाजिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या गौशाला प्रबंधन अंततः जवाबदेही निभाता है या नहीं।


क्या कहते हैं अनुमंडल पदाधिकारी

गोपाल कृष्ण गौशाला, सिवान के सचिव श्याम सुंदर अग्रवाल नागलिया द्वारा अब तक न तो सदस्यों की सूची उपलब्ध कराई गई है और न ही कैश बुक प्रस्तुत की गई है। इसके अलावा एजेंडा भी जमा नहीं किया गया है। इस संबंध में दिया गया तीन दिनों का अल्टीमेटम समाप्त हो चुका है। शीघ्र ही मामले में आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

आशुतोष गुप्ता,
अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), सिवान


क्या कहते हैं श्याम सुंदर अग्रवाल नागलिया के दामाद

इस मामले में गोपाल कृष्ण गौशाला, सिवान के सचिव श्याम सुंदर अग्रवाल नागलिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन उनके दामाद अशोक अग्रवाल ने उठाया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जवाब लिख दिया गया है और उसे शीघ्र ही संबंधित कार्यालय को भेज दिया जाएगा।

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