Urban Development: सिवान नगर परिषद में 54.55 लाख की वसूली, सरकारी खाते में जमा हुए सिर्फ 12.40 लाख

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सिवान नगर परिषद में नक्शा शुल्क घोटाले का आरोप; लोक शिकायत जांच में 37.14 लाख रुपये बकाया मिलने के बाद भी प्रभारी पद पर कायम

क्राइम न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l पटना/सिवान।

नगर परिषद कार्यालय में नक्शा स्वीकृति शुल्क के नाम पर बड़े वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। लोक शिकायत कार्यालय की जांच में यह खुलासा हुआ है कि नगर परिषद के नक्शा प्रभारी अक्षत रोशन द्वारा वर्षों तक नक्शा शुल्क की राशि वसूली गई, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा सरकारी कोष में जमा नहीं कराया गया। जांच रिपोर्ट में 37 लाख 14 हजार 829 रुपये की राशि अब भी बकाया बताई गई है। इसके बावजूद संबंधित कर्मी अब भी उसी पद पर कार्यरत हैं, जिससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, 13 जनवरी 2022 से 28 मई 2025 के बीच कुल 16 रसीद बुक के माध्यम से नक्शा स्वीकृति शुल्क के रूप में 54 लाख 55 हजार 136 रुपये की वसूली की गई। हालांकि सरकारी खाते में मात्र 12 लाख 40 हजार 307 रुपये ही जमा कराए गए। नगर पालिका अधिनियम के अनुसार प्रतिदिन प्राप्त राशि को सरकारी कोष में जमा करना अनिवार्य है, लेकिन जांच में पाया गया कि लंबे समय तक राशि जमा नहीं की गई।

लोक शिकायत कार्यालय पहुंचा मामला, रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि

यह मामला लोक शिकायत निर्वहन पदाधिकारी के समक्ष पहुंचा, जिसके बाद 6 मार्च 2026 को नगर परिषद से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। नगर परिषद द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट में स्पष्ट स्वीकार किया गया कि नक्शा प्रभारी द्वारा पूरी राशि जमा नहीं की गई है और बड़ी रकम अब भी लंबित है।

रिपोर्ट के अनुसार, रसीद संख्या 16299 से 16300 तक 1 लाख 46 हजार 438 रुपये, रसीद संख्या 16301 से 16400 तक 25 लाख 16 हजार 258 रुपये तथा रसीद संख्या 16801 से 16900 तक 10 लाख 63 हजार 103 रुपये सहित विभिन्न रसीद बुक से कुल 54 लाख 55 हजार 136 रुपये की वसूली की गई।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 12 दिसंबर 2025 को 1 लाख 48 हजार 438 रुपये तथा 11 मार्च 2026 को 4 लाख 581 रुपये जमा किए गए। इसके बाद कार्यालय पत्रांक-503 दिनांक 13 मार्च 2026 के माध्यम से तीन दिनों के भीतर पूरी राशि जमा करने का निर्देश देते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया।

स्पष्टीकरण में मजदूर भुगतान का दावा, लेकिन साक्ष्य अधूरा

जवाब में अक्षत रोशन ने तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद कुमार सिंह के निर्देश पर दैनिक मजदूरों के पारिश्रमिक भुगतान के लिए 7 लाख रुपये रोकड़पाल को देने की बात कही। हालांकि जांच में केवल 5 लाख रुपये से संबंधित साक्ष्य ही उपलब्ध कराया गया। शेष 2 लाख रुपये का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। वहीं 5 लाख रुपये का समायोजन भी अब तक लंबित बताया गया है।

इसके बाद 16 मार्च 2026 को 1 लाख 93 हजार 544 रुपये, 17 मार्च को 3 लाख 37 हजार 830 रुपये तथा अन्य तिथियों में राशि जमा की गई, लेकिन कुल जमा राशि 12 लाख 40 हजार 307 रुपये तक ही पहुंच सकी। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेष 37 लाख 14 हजार 829 रुपये अब भी सरकारी कोष में जमा नहीं कराए गए हैं।

टीकाकार पद पर हुई थी नियुक्ति

नगर परिषद अभिलेखों के अनुसार अक्षत रोशन की नियुक्ति वर्ष 2013 में अनुकंपा के आधार पर टीकाकार पद पर की गई थी। बाद में उन्हें नक्शा शाखा की जिम्मेदारी दी गई।

क्या कहती हैं कार्यपालक पदाधिकारी

नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी नीलम श्वेता ने कहा, “मामला संज्ञान में है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त हो चुका है। कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही नक्शा प्रभारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”

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