खास बातचीत : अच्छे शिक्षक, सही फीस और अनुशासन से ही बढ़ेगा स्कूल का स्तर: इंजीनियर सगीर आलम

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इकरा पब्लिक स्कूल, सूरापुर (Siwan) के प्राचार्य बोले—डोर-टू-डोर एडमिशन नहीं, गुणवत्ता खुद खींचती है छात्रों को


एजुकेशन डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सिवान
आज के प्रतिस्पर्धी शिक्षा माहौल में स्कूलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है गुणवत्ता बनाए रखना और अभिभावकों का भरोसा जीतना। आज जिस हिसाब से स्कूल खुल रहे हैं उसी हिसाब से बंद भी हो रहे हैं। आखिर इसके पीछे का कारण क्या है? यही जानने के लिए केएमपी भारत डिजिटल की टीम ने इकरा पब्लिक स्कूल, सूरापुर के प्राचार्य इंजीनियर सगीर आलम से खास बातचीत की। बातचीत में उन्होंने स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों की भूमिका और अभिभावकों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। उनका मानना है कि यदि स्कूल सही दिशा में काम करें तो एडमिशन और रिजल्ट दोनों में सुधार अपने आप दिखेगा। यहां प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश –


सवाल: स्कूल प्रबंधन के लिए सबसे जरूरी क्या है?
जवाब:
सबसे जरूरी है कि स्कूल गार्जियन से जो भी कमिटमेंट करे, उसे हर हाल में पूरा करे। भरोसा एक बार टूट जाए तो उसे दोबारा बनाना मुश्किल होता है। इसलिए पारदर्शिता और ईमानदारी स्कूल की पहचान होनी चाहिए। https://youtu.be/zyjHYydhaTM?si=5Y2Ik4ltbPcZTaUj


सवाल: फीस स्ट्रक्चर को लेकर आपकी क्या राय है?
जवाब:
हर स्कूल को अपने इलाके की आर्थिक स्थिति को समझना चाहिए। जहां का जैसा इलाका है, उसी हिसाब से फीस तय करनी चाहिए। इससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों को शिक्षा का अवसर मिलेगा और अभिभावकों पर बोझ भी नहीं पड़ेगा।


सवाल: बार-बार टीचर बदलने पर आपका क्या कहना है?
जवाब:
यह बिल्कुल सही नहीं है। जब शिक्षक बार-बार बदलते हैं तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। स्कूल को अपने यहां स्थायी और योग्य शिक्षकों को रखना चाहिए, ताकि पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे।


सवाल: टीचर्स ट्रेनिंग कितनी जरूरी है?
जवाब:
बहुत जरूरी है। समय के साथ पढ़ाने के तरीके बदलते रहते हैं। अगर शिक्षक प्रशिक्षित और अपडेट रहेंगे तो बच्चों का रिजल्ट भी बेहतर होगा। अच्छे शिक्षक ही स्कूल की असली ताकत होते हैं।


सवाल: एडमिशन बढ़ाने के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए?
जवाब:
डोर-टू-डोर कैंपेन से ज्यादा जरूरी है स्कूल में अनुशासन और बेहतर रिजल्ट। एक अंग्रेजी कहावत है—“Water attracts water”, यानी गुणवत्ता खुद लोगों को आकर्षित करती है। अगर पढ़ाई अच्छी होगी तो बच्चे अपने आप आएंगे।


सवाल: शिक्षकों के प्रति स्कूल की क्या जिम्मेदारी है?
जवाब:
स्कूल को अपने शिक्षकों की जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। जब शिक्षक संतुष्ट होंगे, तभी वे पूरी निष्ठा से बच्चों को पढ़ाएंगे। इससे स्कूल का माहौल भी सकारात्मक बनेगा।


सवाल: अभिभावकों के लिए आपका क्या संदेश है?
जवाब:
अभिभावक सिर्फ स्कूल पर निर्भर न रहें। एक ‘थंब रूल’ बनाएं—बच्चा जिस क्लास में पढ़ता है, उतने घंटे रोज घर पर भी पढ़ाई करे। इससे उसकी समझ और प्रदर्शन दोनों बेहतर होंगे।


सवाल: शिक्षा का अंतिम उद्देश्य क्या होना चाहिए?
जवाब:
शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। स्कूलों को बच्चों के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक—यानी 360 डिग्री होलिस्टिक डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए। तभी बच्चे जीवन में सफल और जिम्मेदार नागरिक बन पाएंगे।



इंजीनियर सगीर आलम का मानना है कि यदि स्कूल गुणवत्ता, अनुशासन और पारदर्शिता पर ध्यान दें तो उन्हें प्रचार की जरूरत नहीं पड़ेगी। अच्छा काम खुद अपनी पहचान बनाता है।

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