Siwan: जनवादी लेखक संघ की संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा— प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले यथार्थवादी कथाकार थे अमरकांत

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अमरकांत की जन्म शताब्दी पर गूंजी साहित्य और समाज की आवाज

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता l सीवान |

प्रेमचंद परंपरा के सशक्त यथार्थवादी कथाकार, साहित्यकार और नई कहानी आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर अमरकांत की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर सोमवार को जनवादी लेखक संघ, सीवान के तत्वावधान में स्थानीय कन्हैयालाल केंद्रीय जिला पुस्तकालय में भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यप्रेमी युगल किशोर दूबे ने की। संगोष्ठी में साहित्यकारों, अधिवक्ताओं, कवियों और बुद्धिजीवियों ने अमरकांत के साहित्यिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम की शुरुआत जनवादी लेखक संघ के जिला सचिव मार्कण्डेय ने की। उन्होंने अमरकांत के जीवन और साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगरा स्थित भगमलपुर गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने हिंदी भाषा के माध्यम से समाज और देश की सेवा का संकल्प लिया तथा आगरा से प्रकाशित दैनिक “सैनिक” से पत्रकारिता की शुरुआत की।

मार्कण्डेय ने कहा कि अमरकांत की रचनाओं में निम्न मध्यम वर्ग की पीड़ा, शोषण, गरीबी और सामाजिक विसंगतियों का बेहद संवेदनशील और यथार्थवादी चित्रण मिलता है। उनकी कहानियां आम आदमी के संघर्ष को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।

साहित्यकार अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अमरकांत ने प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शहरी निम्न मध्यम वर्ग की समस्याओं को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उन्होंने किसी विचारधारा विशेष का प्रचार नहीं किया, बल्कि जीवन की सच्चाइयों को सहजता और ईमानदारी से प्रस्तुत किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ने कहा कि अमरकांत की रचनाओं पर न इतिहास का दबाव दिखता है और न ही पौराणिकता का प्रभाव। वे वर्तमान समाज की वास्तविकताओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ चित्रित करते हैं। उनकी चर्चित रचनाएं “डिप्टी कलेक्टरी”, “जिंदगी और जोंक” आज भी समाज का आईना हैं।

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संगोष्ठी में कमलेश्वर ओझा, अभय सिंह, राम नरेश सिंह, आनंद राय, डॉ. जगन्नाथ प्रसाद और परमा चौधरी समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अमरकांत को समर्पित कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन हुआ। शायर मेराजुद्दीन तशना ने पिता पर आधारित अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति “सुकून और चैन होता है, वहीं तो बाप होता है…” सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। वहीं नज़रें हयात की गजल “तमाम उम्र तेरा करके इंतजार चले…” को भी श्रोताओं ने सराहा।

हिंदी, भोजपुरी और अंग्रेजी के कवि लाइची हरिराही की कविता “हम नहीं डरेंगे, लड़ेंगे उच्च-नीच की असमानता के खिलाफ” को विशेष प्रशंसा मिली।

कार्यक्रम को सफल बनाने में कन्हैया चौधरी, विभूति राम, पवन पांडेय और राकेश कुमार सहित कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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