शहरी विकास में जनभागीदारी जरूरी, तभी मजबूत होगी नगर व्यवस्था
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता l बसंतपुर (सीवान)।
प्रखंड परिसर स्थित बीआरसी भवन में सोमवार से “शहरी शासन एवं नगरपालिका वित्त” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्रशिक्षण में नगर निकायों की प्रशासनिक कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और जनभागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वार्ड पार्षदों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने नगर परिषद, नगर पंचायत और नगर निगम की संरचना एवं उनकी जिम्मेदारियों की विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि शहरी निकायों में निर्णय लेने की प्रक्रिया किस प्रकार संचालित होती है और विभिन्न स्तरों पर लिए जाने वाले निर्णय किन नियमों और अधिकारों के अंतर्गत लागू किए जाते हैं। प्रशिक्षकों ने कहा कि स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि शहरी शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाने में आम नागरिकों की भागीदारी अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों ने कहा कि जब तक जनता विकास योजनाओं और स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रियाओं से सीधे नहीं जुड़ेगी, तब तक योजनाओं का अपेक्षित लाभ धरातल पर नहीं दिखेगा। इसलिए जनसहभागिता को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।
प्रशिक्षण में नगरपालिका वित्त से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्रतिभागियों को नगर निकायों की आय के स्रोत, कर संग्रहण व्यवस्था, बजट निर्माण प्रक्रिया तथा विकास योजनाओं में वित्तीय प्रबंधन की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वित्तीय अनुशासन और सही बजट प्रबंधन के जरिए शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

बेंगलुरु से आए आईआईएचएस के कंसल्टेंट अभिनव एम और आयशा खानम ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से शहरी प्रशासन की बारीकियों को समझाया। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि आधुनिक शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय पारदर्शिता दोनों का संतुलन जरूरी है। साथ ही उन्होंने स्थानीय निकायों को तकनीक आधारित एवं अधिक जवाबदेह बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें स्थानीय शासन व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला है। उनका कहना था कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ेगी तथा वे विकास कार्यों में अधिक सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
कार्यक्रम में बीओ राकेश कुमार, सेवा भारत की नूतन सिंह, अंजली कुमारी, सुनीता ओझा, मंजू कुमारी, उप मुख्य पार्षद अरुण सिंह, वार्ड पार्षद संजय कुमार, कृष्णा सिंह, चंदा देवी, समुद्री देवी एवं रोहित कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।






