Bihar Health Scam: मुंगेर में जन्म के महीने भर बाद नौकरी, आजादी से पहले रिटायर… 2026 में प्रमोशन!

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स्वास्थ्य विभाग की वरीयता सूची में बड़ा फर्जीवाड़ा, सिस्टम की साख पर सवाल

सेंट्रल डेस्क l केएमपी भारत l भागलपुर

मुंगेर | संतोष सहाय

बिहार के स्वास्थ्य विभाग में लिपिकों की नियुक्ति और प्रमोशन को लेकर चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। 10 मार्च 2026 को जारी 2814 लिपिकों की वरीयता सूची ने ऐसे खुलासे किए हैं, जो न सिर्फ विभागीय व्यवस्था बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सूची में दर्ज कई आंकड़े इतने अविश्वसनीय हैं कि उन्हें देखकर जांच एजेंसियां भी हैरान हैं।


जन्म के तुरंत बाद नौकरी, 1942 में रिटायरमेंट!

सूची में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कर्मचारियों ने जन्म के कुछ दिनों या महीनों बाद ही नौकरी ज्वाइन कर ली। सबसे चौंकाने वाला मामला उस कर्मचारी का है, जिसे आजादी से पहले यानी 1942 में ही रिटायर दिखाया गया है, लेकिन अब 2026 में उसके प्रमोशन की प्रक्रिया चल रही है। यह गड़बड़ी न केवल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे डेटा सिस्टम की गंभीर खामी को उजागर करती है।


35 नाबालिग और 119 ओवरएज कर्मियों की नियुक्ति

रिपोर्ट के अनुसार, 35 ऐसे कर्मचारी हैं जिन्होंने 1 महीने से लेकर 17 वर्ष की उम्र के बीच ही नौकरी ज्वाइन कर ली। वहीं 119 कर्मियों ने अधिकतम आयु सीमा पार करने के बाद नौकरी हासिल की। इनमें कई ऐसे हैं जिन्होंने 42 से 55 वर्ष की उम्र में ज्वाइन किया, जबकि अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तय है। यह सीधे-सीधे भर्ती प्रक्रिया में धांधली की ओर इशारा करता है।


अभी पैदा नहीं हुए, फिर भी नौकरी और प्रमोशन

सूची में आधा दर्जन ऐसे नाम भी हैं, जिनकी जन्मतिथि भविष्य की है। यानी वे अभी पैदा भी नहीं हुए हैं, लेकिन उन्हें पहले ही नौकरी और प्रमोशन दे दिया गया है। यह मामला विभागीय लापरवाही से कहीं ज्यादा संगठित फर्जीवाड़े की ओर संकेत करता है।


चौंकाने वाले उदाहरणों ने खोली पोल

वरीयता सूची के शीर्ष पर मनोज कुमार जायसवाल का नाम है, जिनका जन्म 1975 में और ज्वाइनिंग 1977 में दर्शाई गई है। दूसरे स्थान पर राजू प्रसाद हैं, जिन्होंने जन्म के एक महीने बाद ही नौकरी ज्वाइन की और रिटायरमेंट 1942 में दिखाया गया है।
413वें नंबर पर अरुण कुमार का जन्म 2070 में बताया गया है, लेकिन उन्होंने 1996 में नौकरी ज्वाइन कर ली और 2030 में रिटायरमेंट तय है। वहीं 2023 में जन्मे विनोद कुमार ने दो महीने बाद ही नौकरी ज्वाइन कर ली।


100 साल की उम्र में रिटायरमेंट के मामले

कटिहार और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कर्मियों का रिटायरमेंट 100 साल की उम्र के बाद तय किया गया है। कई ने 50 वर्ष के आसपास नौकरी शुरू की और असामान्य रूप से लंबी सेवा अवधि दर्ज की गई।


योग्यता की अनदेखी, करोड़ों का भुगतान

लिपिक पद के लिए अनिवार्य हिंदी टाइपिंग, कंप्यूटर और अकाउंट परीक्षा में भी भारी अनियमितता सामने आई है। करीब 300 कर्मियों ने इन तीनों में से एक भी परीक्षा पास नहीं की, फिर भी उन्हें सूची में शामिल कर लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले 300 से अधिक लिपिक अब तक वेतन और भत्तों के रूप में 1700 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ले चुके हैं। एक लिपिक की औसत सैलरी करीब 1.10 लाख रुपए बताई जा रही है।


जांच के आदेश, जिम्मेदार कौन?

स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किया जाएगा और फर्जीवाड़ा सामने आने पर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियुक्ति से लेकर प्रमोशन तक इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर कैसे होती रही? क्या इस बार दोषियों पर ठोस कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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