Siwan: गुठनी में पशुओं में तेजी से फैल रहा एफएमडी, तीन की मौत से हड़कंप

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जमुआव समेत कई गांवों में दहशत, पीड़ित पशुपालकों ने टीकाकरण अभियान की उठाई मांग

डिजिटल डेस्क l केएमपी भारत न्यूज़ l पटना

संवाददाता, गुठनी (सीवान) : गुठनी प्रखंड इन दिनों मुंह-पैर रोग (एफएमडी) के प्रकोप से जूझ रहा है। जमुआव गांव में इस संक्रामक बीमारी से तीन पशुओं की मौत होने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। बीमारी का तेज़ी से फैलना और कई पशुओं में इसके लक्षण दिखाई देना स्थानीय पशुपालकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जमुआव गांव में एफएमडी का संक्रमण पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ रहा है। गांव के क्विंटल राय ने बताया कि अब तक तीन पशुओं की मौत हो चुकी है। इनमें श्याम बिहारी राय का बछड़ा, शिव प्रसाद का बछड़ा और एक अन्य ग्रामीण का पशु शामिल है। इसके अलावा कई पशु गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। बीमारी के चलते पशुओं के मुंह और पैरों में गहरे घाव हो रहे हैं, जिससे वे न तो ठीक से चारा खा पा रहे हैं और न ही चल पा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी का प्रकोप अचानक बढ़ने से पूरा इलाका दहशत में है। रामजी राय सहित आसपास के कई घरों के पशु भी इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। पशुपालक अपने पशुओं को बचाने के लिए इलाज और दवा की व्यवस्था को लेकर काफी चिंतित हैं।

इसी बीच जमुआव गांव के क्विंटल राय, नैनीजोर गांव के शत्रुध्न कुमार और पतौवा मिश्र गांव के चंद्रभान मिश्र शुक्रवार को पशु चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने पशु चिकित्सक ब्रजभूषण कुमार से मिलकर तत्काल इलाज की मांग की। चिकित्सक ने घावों की सफाई के लिए बेटाडीन और पोटैसियम परमैंगनेट पाउडर उपलब्ध कराया। साथ ही साफ-सफाई, पशुओं को अलग रखने और दवा समय पर लगाने की सलाह भी दी।

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पशु चिकित्सक ब्रजभूषण कुमार ने कहा कि एफएमडी सामान्यतः जानलेवा नहीं होती, लेकिन कमजोर या पहले से बीमार पशुओं में यह घातक रूप ले सकती है। भोजन न कर पाने और लगातार कमजोरी के कारण कई बार पशुओं की स्थिति बिगड़ जाती है। उन्होंने पशुपालकों को सावधानी बढ़ाने और बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी।

इस बीच ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से प्रभावित गांवों में तत्काल टीकाकरण अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते टीकाकरण नहीं हुआ तो बीमारी और अधिक फैल सकती है, जिससे भारी पशुहानि का खतरा बढ़ जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि विभाग की ओर से त्वरित कार्रवाई ही इस संकट को नियंत्रण में ला सकती है।

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